Revelation 42017

1इन बातों के बाद जो मैंने दृष्‍टि की, तो क्‍या देखता हूँ कि स्‍वर्ग में एक द्वार खुला हुआ है; और जिसको मैंने पहले तुरही के से शब्‍द से अपने साथ बातें करते सुना था, वही कहता है, “यहाँ ऊपर आ जा, और मैं वे बातें तुझे दिखाऊँगा, जिनका इन बातों के बाद पूरा होना अवश्‍य है।”

2तुरन्‍त मैं आत्‍मा में आ गया; और क्‍या देखता हूँ कि एक सिंहासन स्‍वर्ग में रखा है, और उस सिंहासन पर कोई बैठा है।

3और जो उस पर बैठा है, वह यशब और माणिक्य सा दिखाई पड़ता है, और उस सिंहासन के चारों ओर मरकत सा एक मेघधनुष दिखाई देता है।

4उस सिंहासन के चारों ओर चौबीस सिंहासन है; और इन सिंहासनों पर चौबीस प्राचीन श्‍वेत वस्‍त्र पहने हुए बैठे हैं, और उनके सिरों पर सोने के मुकुट हैं।

5उस सिंहासन में से बिजलियाँ और गर्जन निकलते हैं और सिंहासन के सामने आग के सात दीपक जल रहे हैं, वे परमेश्‍वर की सात आत्माएँ हैं,

6और उस सिंहासन के सामने मानो बिल्‍लौर के समान काँच का सा समुद्र है, और सिंहासन के बीच में और सिंहासन के चारों ओर चार प्राणी है, जिनके आगे-पीछे आँखें ही आँखें हैं।

7पहला प्राणी सिंह के समान है, और दूसरा प्राणी का बछड़े के समान है, तीसरे प्राणी का मुँह मनुष्‍य का सा है, और चौथा प्राणी उड़ते हुए उकाब के समान है।

8और चारों प्राणियों के छ:-छ: पंख हैं, और चारों ओर, और भीतर आँखें ही आँखें हैं; और वे रात-दिन बिना विश्राम लिए यह कहते रहते हैं, “पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु परमेश्‍वर, सर्वशक्तिमान, जो था, और जो है, और जो आनेवाला है।”

9और जब वे प्राणी उसकी जो सिंहासन पर बैठा है, और जो युगानुयुग जीवता है, महिमा और आदर और धन्‍यवाद करेंगे।

10तब चौबीसों प्राचीन सिंहासन पर बैठनेवाले के सामने गिर पड़ेंगे, और उसे जो युगानुयुग जीवता है प्रणाम करेंगे; और अपने-अपने मुकुट सिंहासन के सामने यह कहते हुए डाल देंगे,

11“हे हमारे प्रभु, और परमेश्‍वर, तू ही महिमा, और आदर, और सामर्थ्य के योग्‍य है; क्‍योंकि तू ही ने सब वस्तुएँ सृजीं और वे तेरी ही इच्‍छा से थी, और सृजी गईं।

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