Revelation 202017

1फिर मैने एक स्‍वर्गदूत को स्‍वर्ग से उतरते देखा; जिसके हाथ में अथाह कुण्ड की कुंजी, और एक बड़ी जंजीर थी।

2और उसने उस अजगर, अर्थात् पुराने साँप को, जो इब्लीस और शैतान है; पकड़कर हजार वर्ष के लिये बाँध दिया,

3और उसे अथाह कुण्ड में डालकर बन्‍द कर दिया और उस पर मुहर कर दी, कि वह हजार वर्ष के पूरे होने तक जाति-जाति के लोगों को फिर न भरमाए। इसके बाद अवश्‍य है कि थोड़ी देर के लिये फिर खोला जाए।

4फिर मैंने सिंहासन देखे, और उन पर लोग बैठ गए, और उनको न्‍याय करने का अधिकार दिया गया। और उनकी आत्‍माओं को भी देखा, जिनके सिर यीशु की गवाही देने और परमेश्‍वर के वचन के कारण काटे गए थे, और जिन्होंने न उस पशु की, और न उसकी मूर्ति की पूजा की थी, और न उसकी छाप अपने माथे और हाथों पर ली थी। वे जीवित होकर मसीह के साथ हजार वर्ष तक राज्‍य करते रहे।

5जब तक ये हजार वर्ष पूरे न हुए तक तक शेष मरे हुए न जी उठे। यह तो पहला पुनरुत्थान है।

6धन्‍य और पवित्र वह है, जो इस पहले पुनरूत्‍थान का भागी है, ऐसों पर दूसरी मृत्‍यु का कुछ भी अधिकार नहीं, पर वे परमेश्‍वर और मसीह के याजक होंगे, और उसके साथ हजार वर्ष तक राज्‍य करेंगे।

7जब हजार वर्ष पूरे हो चुकेंगे तो शैतान कैद से छोड़ दिया जाएगा।

8और उन जातियों को जो पृथ्‍वी के चारों ओर होंगी, अर्थात् गोग और मागोग को जिनकी गिनती समुद्र की बालू के बराबर होगी, भरमाकर लड़ाई के लिये इकट्ठे करने को निकलेगा।

9और वे सारी पृथ्‍वी पर फैल जाएँगी और पवित्र लोगों की छावनी और प्रिय नगर को घेर लेंगी और आग स्‍वर्ग से उतरकर उन्‍हें भस्‍म करेगी।

10और उनका भरमानेवाला शैतान आग और गन्‍धक की उस झील में, जिसमें वह पशु और झूठा भविष्‍यद्वक्‍ता भी होगा, डाल दिया जाएगा; और वे रात-दिन युगानुयुग पीड़ा में तड़पते रहेंगे।

11फिर मैंने एक बड़ा श्‍वेत सिंहासन और उसको जो उस पर बैठा हुआ है, देखा, जिसके सामने से पृथ्‍वी और आकाश भाग गए, और उनके लिये जगह न मिली।

12फिर मैंने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के सामने खड़े हुए देखा, और पुस्‍तकें खोली गई; और फिर एक और पुस्‍तक खोली गईं, अर्थात् जीवन की पुस्‍तक; और जैसे उन पुस्‍तकों में लिखा हुआ था, उनके कामों के अनुसार मरे हुओं का न्‍याय किया गया।

13और समुद्र ने उन मरे हुओं को जो उसमें थे दे दिया, और मृत्‍यु और अधोलोक ने उन मरे हुओं को जो उनमें थे दे दिया; और उनमें से हर एक के कामों के अनुसार उनका न्‍याय किया गया।

14और मृत्‍यु और अधोलोक भी आग की झील में डाले गए। यह आग की झील तो दूसरी मृत्‍यु है।

15और जिस किसी का नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की झील में डाला गया।

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