Revelation 182017

1इसके बाद मैंने एक स्‍वर्गदूत को स्‍वर्ग से उतरते देखा, जिसका बड़ा अधिकार प्राप्त था; और पृथ्‍वी उसके तेज से प्रकाशित हो उठी।

2उसने ऊँचे शब्‍द से पुकारकर कहा, “गिर गया, बड़ा बेबीलोन गिर गया है! और दुष्‍टात्‍माओं का निवास, और हर एक अशुद्ध आत्‍मा का अड्डा, और हर एक अशुद्ध और घृणित पक्षी का अड्डा हो गया।

3“क्‍योंकि उसके व्‍यभिचार के भयानक मदिरा के कारण सब जातियाँ गिर गई हैं, और पृथ्‍वी के राजाओं ने उसके साथ व्‍यभिचार किया है; और पृथ्‍वी के व्‍यापारी उसके सुख-विलास की बहुतायत के कारण धनवान हुए हैं।”

4फिर मैंने स्‍वर्ग से एक और शब्‍द सुना, “हे मेरे लोगों, उसमें से निकल आओ कि तुम उसके पापों में भागी न हो, और उसकी विपत्तियों में से कोई तुम पर आ न पड़े;

5क्‍योंकि उसके पापों का ढेर स्‍वर्ग तक पहुँच गया हैं, और उसके अधर्म परमेश्‍वर को स्‍मरण आए हैं।

6“जैसा उसने तुम्‍हें दिया है, वैसा ही उसको दो, और उसके कामों के अनुसार उसे दो गुणा बदला दो, जिस कटोरे में उसने भर दिया था उसी में उसके लिये दो गुणा भर दो।

7“जितनी उसने अपनी बड़ाई की और सुख-विलास किया; उतनी उसको पीड़ा, और शोक दो; क्‍योंकि वह अपने मन में कहती है, ‘मैं रानी हो बैठी हूँ, विधवा नहीं; और शोक में कभी न पड़ूँगी।’

8“इस कारण एक ही दिन में उस पर विपत्तियाँ आ पड़ेंगी, अर्थात् मृत्‍यु, और शोक, और अकाल; और वह आग में भस्‍म कर दी जाएगी, क्‍योंकि उसका न्‍यायी प्रभु परमेश्‍वर शक्तिमान है।

9“और पृथ्‍वी के राजा जिन्होंने उसके साथ व्‍यभिचार, और सुख-विलास किया, जब उसके जलने का धुआँ देखेंगे, तो उसके लिये रोएँगे, और छाती पीटेंगे।

10और उसकी पीड़ा के डर के मारे वे बड़ी दूर खड़े होकर कहेंगे, ‘हे बड़े नगर, बेबीलोन! हे दृढ़ नगर, हाय! हाय! घड़ी ही भर में तुझे दण्‍ड मिल गया है।’

11“और पृथ्‍वी के व्‍यापारी उसके लिये रोएँगे और कलपेंगे, क्‍योंकि अब कोई उन का माल मोल न लेगा—

12अर्थात् सोना, चाँदी, रत्‍न, मोती, और मलमल, और बैंजनी, और रेशमी, और लाल रंग के कपड़े, और हर प्रकार का सुगन्‍धित काठ, और हाथी दाँत की हर प्रकार की वस्तुएँ, और बहुमूल्य काठ, और पीतल, और लोहे, और संगमरमर की सब भाँति के पात्र,

13और दालचीनी, मसाले, धूप, इत्र, लोबान, मदिरा, तेल, मैदा, गेहूँ, गाय-बैल, भेड़-बकरियाँ, घोड़े, रथ, और दास, और मनुष्‍यों के प्राण।

14“अब मेरे मन भावने फल तेरे पास से जाते रहे; और स्‍वादिष्‍ट और भड़कीली वस्तुएँ तुझ से दूर हुई हैं, और वे फिर कदापि न मिलेंगी।

15“इन वस्‍तुओं के व्‍यापारी जो उसके द्वारा धनवान हो गए थे, उसकी पीड़ा के डर के मारे दूर खड़े होंगे, और रोते और कलपते हुए कहेंगे,

16‘हाय! हाय! यह बड़ा नगर जो मलमल, और बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े पहने था, और सोने, और रत्‍नों, और मोतियों से सजा था;

17घड़ी ही भर में उसका ऐसा भारी धन नाश हो गया।’ और हर एक माँझी, और जलयात्री, और मल्‍लाह, और जितने समुद्र से कमाते हैं, सब दूर खड़े हुए,

18और उसके जलने का धुआँ देखते हुए पुकारकर कहेंगे, ‘कौन सा नगर इस बड़े नगर के समान है?’

19और अपने-अपने सिरों पर धूल डालेंगे, और रोते हुए और कलपते हुए चिल्‍ला-चिल्‍लाकर कहेंगे, ‘हाय! हाय! यह बड़ा नगर जिसकी सम्‍पत्ति के द्वारा समुद्र के सब जहाजवाले धनी हो गए थे, घड़ी ही भर में उजड़ गया।’

20“हे स्‍वर्ग, और हे पवित्र लोगों, और प्रेरितों, और भविष्‍यद्वक्‍ताओं, उस पर आनन्‍द करो, क्‍योंकि परमेश्‍वर ने न्‍याय करके उससे तुम्‍हारा पलटा लिया है।”

21फिर एक बलवन्‍त स्‍वर्गदूत ने बड़ी चक्‍की के पाट के समान एक पत्‍थर उठाया, और यह कहकर समुद्र में फेंक दिया, “बड़ा नगर बेबीलोन ऐसे ही बड़े बल से गिराया जाएगा, और फिर कभी उसका पता न मिलेगा।

22“और वीणा बजानेवालों, और गायकों, और बंसी बजानेवालों, और तुरही फूँकनेवालों का शब्‍द फिर कभी तुझ में सुनाई न देगा, और किसी उद्यम का कोई कारीगर भी फिर कभी तुझ में न मिलेगा; और चक्‍की के चलने का शब्‍द फिर कभी तुझ में सुनाई न देगा;

23और दीया का उजाला फिर कभी तुझ में न चमकेगा और दूल्‍हे और दुल्हन का शब्‍द फिर कभी तुझ में सुनाई न देगा; क्‍योंकि तेरे व्यापारी पृथ्‍वी के प्रधान थे, और तेरे टोने से सब जातियाँ भरमाई गई थी।

24और भविष्‍यद्वक्‍ताओं और पवित्र लोगों, और पृथ्‍वी पर सब घात किए हुओं का लहू उसी में पाया गया।”

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