Matthew 72017

1”दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए।

2”क्‍योंकि जिस प्रकार तुम दोष लगाते हो, उसी प्रकार तुम पर भी दोष लगाया जाएगा; और जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्‍हारे लिये भी नापा जाएगा।

3”तू क्‍यों अपने भाई की आँख के तिनके को देखता है, और अपनी आँख का लट्ठा तुझे नहीं सूझता?

4”जब तेरी ही आँख मे लट्ठा है, तो तू अपने भाई से कैसे कह सकता है, कि ला मैं तेरी आँख से तिनका निकाल दूँ?

5”हे कपटी, पहले अपनी आँख में से लट्ठा निकाल ले, तब तू अपने भाई की आँख का तिनका भली भाँति देखकर निकाल सकेगा।

6”पवित्र वस्‍तु कुत्तों को न दो, और अपने मोती सूअरों के आगे मत डालो; ऐसा न हो कि वे उन्‍हें पाँवों तले रौंदें और पलटकर तुम को फाड़ डालें।

7”माँगो, तो तुम्‍हें दिया जाएगा; ढूँढ़ो, तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्‍हारे लिये खोला जाएगा।

8”क्‍योंकि जो कोई माँगता है, उसे मिलता है; और जो ढूँढ़ता है, वह पाता है। और जो खटखटाता है, उसके लिये खोला जाएगा।

9”तुम में से ऐसा कौन मनुष्‍य है, कि यदि उसका पुत्र उससे रोटी माँगे, तो वह उसे पत्‍थर दे?

10”या मछली माँगे, तो उसे साँप दे?

11”अतः जब तुम बुरे होकर, अपने बच्‍चों को अच्‍छी वस्तुएँ देना जानते हो, तो तुम्‍हारा स्‍वर्गीय पिता अपने माँगनेवालों को अच्‍छी वस्तुएँ क्‍यों न देगा?

12”इस कारण जो कुछ तुम चाहते हो, कि मनुष्‍य तुम्‍हारे साथ करें, तुम भी उनके साथ वैसा ही करो; क्‍योंकि व्‍यवस्‍था और भविष्‍यद्वक्‍तओं की शिक्षा यही है।

13”सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्‍योंकि चौड़ा है वह फाटक और सरल है वह मार्ग जो विनाश को पहुँचाता है; और बहुतेरे हैं जो उससे प्रवेश करते हैं।

14”क्‍योंकि सकेत है वह फाटक और सकरा है वह मार्ग जो जीवन को पहुँचाता है, और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं।

15”झूठे भविष्‍यद्वक्‍ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्‍हारे पास आते हैं, परन्‍तु अन्‍तर में फाड़नेवाले भड़िए हैं।

16”उनके फलों से तुम उन्‍हें पहचान लोगे। क्‍या झाड़ियों से अँगूर, वा ऊँटकटारों से अंजीर तोड़ते हैं?

17”इसी प्रकार हर एक अच्‍छा पेड़ अच्‍छा फल लाता है और निकम्‍मा पेड़ बुरा फल लाता है।

18”अच्‍छा पेड़ बुरा फल नहीं ला सकता, और न निकम्‍मा पेड़ अच्‍छा फल ला सकता है।

19”जो-जो पेड़ अच्‍छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में डाला जाता है।

20”अतः उनके फलों से तुम उन्‍हें पहचान लोगे।

21”जो मुझ से, ‘हे प्रभु, हे प्रभु’ कहता है, उन में से हर एक स्वर्ग के राज्‍य में प्रवेश न करेगा, परन्‍तु वही जो मेरे स्‍वर्गीय पिता की इच्‍छा पर चलता है।

22”उस दिन बहुतेरे मुझ से कहेंगे; ‘हे प्रभु, हे प्रभु, क्‍या हम ने तेरे नाम से भविष्‍यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्‍टात्‍माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत अचम्‍भे के काम नहीं किए?’

23”तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा कि मैंने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करनेवालों, मेरे पास से चले जाओ।

24”इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्‍हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्‍य के समान ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया।

25”और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियाँ चलीं, और उस घर पर टक्‍करें लगीं, परन्‍तु वह नहीं गिरा, क्‍योंकि उसकी नींव चट्टान पर डाली गई थी।

26”परन्‍तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्‍य के समान ठहरेगा जिसने अपना घर बालू पर बनाया।

27”और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियाँ चलीं, और उस घर पर टक्‍करें लगीं और वह गिरकर सत्‍यानाश हो गया।”

28जब यीशु ये बातें कह चुका, तो ऐसा हुआ कि भीड़ उसके उपदेश से चकित हुई।

29क्‍योंकि वह उनके शास्‍त्रियों के समान नहीं परन्‍तु अधिकारी के समान उन्‍हें उपदेश देता था।

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