Matthew 202017

1”स्‍वर्ग का राज्‍य किसी गृहस्‍थ के समान है, जो सबेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए।

2”और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्‍हें अपने दाख की बारी में भेजा।

3”फिर पहर एक दिन चढ़े, निकलकर, अन्य लोगों को बाजार में बेकार खड़े देखकर,

4और उनसे कहा, ‘तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्‍हें दूँगा।’ सो वे भी गए।

5”फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया।

6”और एक घंटा दिन रहे फिर निकलकर दूसरों को खड़े पाया, और उनसे कहा ‘तु क्‍यों यहाँ दिन भर बेकार खड़े रहे?’ उन्होंने उससे कहा, ‘इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया।’

7उसने उनसे कहा, ‘तुम भी दाख की बारी में जाओ।’

8”साँझ को दाख बारी के स्‍वामी ने अपने भण्‍डारी से कहा, ‘मजदूरों को बुलाकर पिछलों से लेकर पहिलों तक उन्‍हें मजदूरी दे दे।’

9“जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्‍हें एक एक दीनार मिला।

10”जो पहले आए, उन्होंने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्‍तु उन्‍हें भी एक ही एक दीनार मिला।

11”जब मिला, तो वह गृह स्वामी पर कुड़कुड़ा के कहने लगे।

12कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्‍हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्‍होंने दिन भर का भार उठाया और धुप सहा?

13”उसने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्‍याय नहीं करता; क्‍या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया?

14‘जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्‍छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूँ।

15‘क्‍या यह उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूँ सो करूँ? क्‍या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्‍टि से देखता है?’

16”इसी रीति से जो पिछले हैं, वह पहले होंगे, और जो पहले हैं, वे पिछले होंगे।”

17यीशु यरूशलेम को जाते हुए बारह चेलों को एकान्‍त में ले गया, और मार्ग में उनसे कहने लगा।

18”देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं; और मनुष्‍य का पुत्र महायाजकों और शास्‍त्रियों के हाथ पकड़वाया जाएगा और वे उसको घात के योग्‍य ठहराएँगे।

19और उसको अन्‍यजातियों के हाथ सोंपेंगे, कि वे उसे ठट्ठों में उड़ाएँ, और कोड़े मारें, और क्रूस पर चढ़ाएँ, और वह तीसरे दिन जिलाया जाएगा।”

20जब जब्‍दी के पुत्रों की माता ने अपने पुत्रों के साथ उसके पास आकर प्रणाम किया, और उससे कुछ माँगने लगी।

21उसने उससे कहा, “तू क्‍या चाहती है?” वह उससे बोली, “यह कह, कि मेरे ये दो पुत्र तेरे राज्‍य में एक तेरे दाहिने और एक तेरे बाएँ बैठें।”

22यीशु ने उत्तर दिया, “तुम नहीं जानते कि क्‍या माँगते हो? जो कटोरा मैं पीने पर हूँ, क्‍या तुम पी सकते हो?” उन्होंने उससे कहा, “पी सकते हैं।”

23उसने उनसे कहा, “तुम मेरा कटोरा तो पीओगे पर अपने दाहिने बाएँ किसी को बैठाना मेरा काम नहीं, पर जिनके लिये मेरे पिता की ओर से तैयार किया गया, उन्हीं के लिये है।”

24यह सुनकर, दसों चेले उन दोनों भाइयों पर क्रुद्ध हुए।

25यीशु ने उन्‍हें पास बुलाकर कहा, “तुम जानते हो, कि अन्‍य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं; और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं।

26”परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्‍हारा सेवक बने;

27और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्‍हारा दास बने;

28जैसे कि मनुष्‍य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उसकी सेवा टहल किई जाए, परन्‍तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपने प्राण दे।”

29जब वे यरीहो से निकल रहे थे, तो एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली।

30और देखो, दो अन्‍धे, जो सड़क के किनारे बैठे थे, यह सुनकर कि यीशु जा रहा है, पुकारकर कहने लगे, “हे प्रभु, दाऊद की सन्‍तान, हम पर दया कर।”

31लोगों ने उन्‍हें डाँटा, कि चुप रहे, पर वे और भी चिल्‍लाकर बोले, “हे प्रभु, दाऊद की सन्‍तान, हम पर दया कर।”

32तब यीशु ने खडे होकर, उन्‍हें बुलाया, और कहा, “तुम क्‍या चाहते हो कि मैं तुम्‍हारे लिये करूँ?”

33उन्होंने उससे कहा, “हे प्रभु, यह कि हमारी आँखे खुल जाएँ।”

34यीशु ने तरस खाकर उनकी आँखे छूई, और वे तुरन्‍त देखने लगे; और उसके पीछे हो लिए।

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