Matthew 182017

1उसी घड़ी चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, “स्‍वर्ग के राज्‍य में बड़ा कौन है?”

2इस पर उसने एक बालक को पास बुलाकर उनके बीच में खड़ा किया,

3और कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्‍वर्ग के राज्‍य में प्रवेश करने नहीं पाओगे।

4”जो कोई अपने आप को इस बालक के समान छोटा करेगा, वह स्‍वर्ग के राज्‍य में बड़ा होगा।

5”और जो कोई मेरे नाम से एक ऐसे बालक को ग्रहण करता है वह मुझे ग्रहण करता है।

6पर जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर विश्‍वास करते हैं एक को ठोकर खिलाए, उसके लिये भला होता, कि बड़ी चक्‍की का पाट उसके गले में लटकाया जाता, और वह गहिरे समुद्र में डुबाया जाता।

7”ठोकरों के कारण संसार पर हाय! ठोकरों का लगना अवश्‍य है; पर हाय उस मनुष्‍य पर जिसके द्वारा ठोकर लगती है।

8”यदि तेरा हाथ या तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए, तो काटकर फेंक दे; टुण्‍डा या लंगड़ा होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो हाथ या दो पांव रहते हुए तू अनन्‍त आग में डाला जाए।

9”और यदि तेरी आँख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकालकर फेंक दे। काना होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो आँख रहते हुए तू नरक की आग में डाला जाए।

10”देखो, तुम इन छोटों में से किसी को तुच्‍छ न जानना; क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि स्‍वर्ग में उनके दूत मेरे स्‍वर्गीय पिता का मुँह सदा देखते हैं।

11[“क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को बचाने आया है।] [Ms. 1]

12”तुम क्‍या समझते हो? यदि किसी मनुष्‍य की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक भटक जाए, तो क्‍या निन्यानबे को छोड़कर, और पहाड़ों पर जाकर, उस भटकी हुई को न ढूंढ़ेगा?

13”और यदि ऐसा हो कि उसे पाए, तो मैं तुम से सच कहता हूँ, कि वह उन निन्यानबे भेड़ों के लिये जो भटकी नहीं थीं इतना आनन्‍द नहीं करेगा, जितना कि इस भेड़ के लिये करेगा।

14”ऐसा ही तुम्‍हारे पिता की जो स्‍वर्ग में है यह इच्‍छा नहीं, कि इन छोटों में से एक भी नाश हो।

15”यदि तेरा भाई तेरे विरुद्ध अपराध करे, तो जा और अकेले में बातचीत करके उसे समझा; यदि वह तेरी सुने तो तू ने अपने भाई को पा लिया।

16”और यदि वह न सुने, तो और एक दो जन को अपने साथ ले जा, कि हर एक बात दो या तीन गवाहों के मुँह से ठहराई जाए।

17”यदि वह उनकी भी न माने, तो कलीसिया से कह दे, परन्‍तु यदि वह कलीसिया की भी न माने, तो तू उसे अन्‍यजाति और महसूल लेनेवाले के जैसा जान।

18”मैं तुम से सच कहता हूँ, जो कुछ तुम पृथ्‍वी पर बाँधोगे, वह स्‍वर्ग पर बंधेगा और जो कुछ तुम पृथ्‍वी पर खोलोगे, वह स्‍वर्ग में खुलेगा।

19”फिर मैं तुम से कहता हूँ, यदि तुम में से दो जन पृथ्‍वी पर किसी बात के लिये जिसे वे माँगें, एक मन के हों, तो वह मेरे पिता की ओर से जो स्‍वर्ग में है उनके लिये हो जाएगी।

20”क्‍योंकि जहाँ दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठे होते हैं वहाँ मैं उनके बीच में होता हूँ।”

21तब पतरस ने पास आकर, उससे कहा, “हे प्रभु, यदि मेरा भाई अपराध करता रहे, तो मैं कितनी बार उसे क्षमा करूँ, क्‍या सात बार तक?”

22यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझ से यह नहीं कहता, कि सात बार, वरन् सात बार के सत्तर गुने तक।

23”इसलिये स्‍वर्ग का राज्‍य उस राजा के समान है, जिसने अपने दासों से लेखा लेना चाहा।

24”जब वह लेखा लेने लगा, तो एक जन उसके सामने लाया गया जो दस हजार तोड़े का कर्जदार था।

25”जब कि चुकाने को उसके पास कुछ न था, तो उसके स्‍वामी ने कहा, कि यह और इस की पत्‍नी और बाल-बच्चे और जो कुछ इस का है सब बेचा जाए, और वह कर्ज चुका दिया जाए।

26”इस पर उस दास ने गिरकर उसे प्रणाम किया, और कहा, ‘हे स्‍वामी, धीरज धर, मैं सब कुछ भर दूँगा।’

27”तब उस दास के स्‍वामी ने तरस खाकर उसे छोड़ दिया, और उसका कर्ज क्षमा किया।

28”परन्‍तु जब वह दास बाहर निकला, तो उसके संगी दासों में से एक उसको मिला, जो उसके सौ दीनार का कर्जदार था; उसने उसे पकड़कर उसका गला घोंटा और कहा, ‘जो कुछ तू धारता है भर दे।’

29”इस पर उसका संगी दास गिरकर, उससे विनती करने लगा; कि धीरज धर मैं सब भर दूँगा।

30”उसने न माना, परन्‍तु जाकर उसे बन्‍दीगृह में डाल दिया; कि जब तक कर्ज को भर न दे, तब तक वहीं रहे।

31”उसके संगी दास यह जो हुआ था देखकर बहुत उदास हुए, और जाकर अपने स्‍वामी को पूरा हाल बता दिया।

32”तब उसके स्‍वामी ने उसको बुलाकर उससे कहा, हे दुष्‍ट दास, तू ने जो मुझ से विनती की, तो मैं ने तो तेरा वह पूरा कर्ज क्षमा किया।

33‘इसलिए जैसा मैं ने तुझ पर दया की, वैसे ही क्‍या तुझे भी अपने संगी दास पर दया करना नहीं चाहिए था?’

34”और उसके स्‍वामी ने क्रोध में आकर उसे दण्‍ड देनेवालों के हाथ में सौंप दिया, कि जब तक वह सब कर्जा भर न दे, तब तक उनके हाथ में रहे।

35”इसी प्रकार यदि तुम में से हर एक अपने भाई को मन से क्षमा न करेगा, तो मेरा पिता जो स्‍वर्ग में है, तुम से भी वैसा ही करेगा।”

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