Mark 92017

1और उसने उनसे कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जो यहाँ खड़े हैं, उनमें से कोई ऐसे हैं, कि जब तक परमेश्‍वर के राज्‍य को सामर्थ्य सहित आता हुआ न देख लें, तब तक मृत्‍यु का स्‍वाद कदापि न चखेंगे।”

2छ: दिन के बाद यीशु ने पतरस और याकूब और यूहन्ना को साथ लिया, और एकान्‍त में किसी ऊँचे पहाड़ पर ले गया; और उनके सामने उसका रूप बदल गया।

3और उसका वस्‍त्र ऐसा चमकने लगा और यहाँ तक अति उज्‍जवल हुआ, कि पृथ्‍वी पर कोई धोबी भी वैसा उज्‍जवल नहीं कर सकता।

4और उन्‍हें मूसा के साथ एलिय्‍याह दिखाई दिया; और वे यीशु के साथ बातें करते थे।

5इस पर पतरस ने यीशु से कहा, “हे रब्‍बी, हमारा यहाँ रहना अच्‍छा है: इसलिये हम तीन मण्‍डप बनाएं; एक तेरे लिये, एक मूसा के लिये, और एक एलिय्‍याह के लिये।”

6क्‍योंकि वह न जानता था कि क्‍या उत्तर दे, इसलिये कि वे बहुत डर गए थे।

7तब एक बादल ने उन्‍हें छा लिया, और उस बादल में से यह शब्‍द निकला, “यह मेरा प्रिय पुत्र है; उसकी सुनो।”

8तब उन्‍होंने एकाएक चारों ओर दृष्‍टि की, और यीशु को छोड़ अपने साथ और किसी को न देखा।

9पहाड़ से उतरते हुए, उसने उन्‍हें आज्ञा दी, कि जब तक मनुष्‍य का पुत्र मरे हुओं में से जी न उठे, तब तक जो कुछ तुम ने देखा है वह किसी से न कहना।

10उन्‍होंने इस बात को स्‍मरण रखा; और आपस में वाद-विवाद करने लगे, कि मरे हुओं में से जी उठने का क्‍या अर्थ है?

11और उन्‍होंने उससे पूछा, “शास्‍त्री क्‍यों कहते हैं, कि एलिय्‍याह का पहले आना अवश्‍य है?”

12उसने उन्‍हें उत्तर दिया, “एलिय्‍याह सचमुच पहले आकर सब कुछ सुधारेगा, परन्‍तु मनुष्‍य के पुत्र के विषय में यह क्‍यों लिखा है, कि वह बहुत दुख उठाएगा, और तुच्‍छ गिना जाएगा?

13परन्‍तु मैं तुम से कहता हूँ, कि एलिय्‍याह तो आ चुका, और जैसा उसके विषय में लिखा है, उन्‍होंने जो कुछ चाहा उसके साथ किया।”

14और जब वह चेलों के पास आया, तो देखा कि उनके चारों ओर बड़ी भीड़ लगी है और शास्‍त्री उनके साथ विवाद कर रहें हैं।

15और उसे देखते ही सब बहुत ही आश्‍चर्य करने लगे, और उसकी ओर दौड़कर उसे नमस्‍कार किया।

16उसने उनसे पूछा, “तुम इन से क्‍या विवाद कर रहे हो?”

17भीड़ में से एक ने उसे उत्तर दिया, “हे गुरू, मैं अपने पुत्र को, जिसमें गूंगी आत्‍मा समाई है, तेरे पास लाया था।

18जहाँ कहीं वह उसे पकड़ती है, वहीं पटक देती है; और वह मुंह में फेन भर लाता, और दांत पीसता, और सूखता जाता है। और मैं ने तेरे चेलों से कहा था, कि वे उसे निकाल दें, परन्‍तु वह निकाल न सके।”

19यह सुनकर उसने उनसे उत्तर देके कहा, “हे अविश्‍वासी लोगों, मैं कब तक तुम्‍हारे साथ रहूँगा? और कब तक तुम्‍हारी सहूँगा? उसे मेरे पास लाओ।”

20तब वे उसे उसके पास ले आए। और जब उसने उसे देखा, तो उस आत्‍मा ने तुरन्‍त उसे मरोड़ा, और वह भूमि पर गिरा, और मुंह से फेन बहाते हुए लोटने लगा।

21उसने उसके पिता से पूछा, “इस की यह दशा कब से है?” और उसने कहा, “बचपन से।

22उसने इसे नाश करने के लिये कभी आग और कभी पानी में गिराया; परन्‍तु यदि तू कुछ कर सके, तो हम पर तरस खाकर हमारा उपकार कर।”

23यीशु ने उससे कहा, “यदि तू कर सकता है! यह क्‍या बात है? विश्‍वास करनेवाले के लिये सब कुछ हो सकता है।”

24बालक के पिता ने तुरन्‍त गिड़गिड़ाकर कहा, “हे प्रभु, मैं विश्‍वास करता हूँ; मेरे अविश्‍वास का उपाय कर।”

25जब यीशु ने देखा, कि लोग दौड़कर भीड़ लगा रहे हैं, तो उसने अशु़द्ध आत्‍मा को यह कहकर डाँटा, कि “हे गूंगी और बहिरी आत्‍मा, मैं तुझे आज्ञा देता हूँ, उसमें से निकल आ, और उसमें फिर कभी प्रवेश न कर।”

26तब वह चिल्‍लाकर, और उसे बहुत मरोड़ कर, निकल आई; और बालक मरा हुआ सा हो गया, यहाँ तक कि बहुत लोग कहने लगे, कि वह मर गया।

27परन्‍तु यीशु ने उसका हाथ पकड़ के उसे उठाया, और वह खड़ा हो गया।

28जब वह घर में आया, तो उसके चेलों ने एकान्‍त में उससे पूछा, “हम उसे क्‍यों न निकाल सके?”

29उसने उनसे कहा, “यह जाति बिना प्रार्थना किसी और उपाय से निकल नहीं सकती।”

30फिर वे वहाँ से चले, और गलील में होकर जा रहे थे, और वह अपने चेलों को उपदेश देता और उनसे कहता था, “मनुष्‍य का पुत्र, मनुष्‍यों के हाथ में पकड़वाया जाएगा, और वे उसे मार डालेंगे; और वह मरने के तीन दिन बाद जी उठेगा।”

31पर यह बात उनकी समझ में नहीं आई, और वे उससे पूछने से डरते थे।

32फिर वे कफरनहूम में आए; और घर में आकर उसने उनसे पूछा, कि रास्‍ते में तुम किस बात पर विवाद करते थे?

33वे चुप रहे, क्‍योंकि मार्ग में उन्‍होंने आपस में यह वाद-विवाद किया था, कि हम में से बड़ा कौन है?

34वे चुप रहे, क्‍योंकि मार्ग में उन्‍होंने आपस में यह वाद-विवाद किया था, कि हम में से बड़ा कौन है?

35तब उसने बैठकर बारहों को बुलाया, और उनसे कहा, “यदि कोई बड़ा होना चाहे, तो सब से छोटा और सब का सेवक बने।”

36और उसने एक बालक को लेकर उनके बीच में खड़ा किया, और उसको गोद में लेकर उनसे कहा,

37“जो कोई मेरे नाम से ऐसे बालकों में से किसी एक को भी ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो कोई मुझे ग्रहण करता, वह मुझे नहीं, वरन मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है।”

38तब यूहन्ना ने उससे कहा, “हे गुरु, हम ने एक मनुष्‍य को तेरे नाम से दुष्‍टात्‍माओं को निकालते देखा और हम उसे मना करने लगे, क्‍योंकि वह हमारे पीछे नहीं हो लेता था।”

39यीशु ने कहा, “उस को मना मत करो; क्‍योंकि ऐसा कोई नहीं जो मेरे नाम से सामर्थ्य का काम करे, और जल्‍दी से मुझे बुरा कह सके,

40क्‍योंकि जो हमारे विरोध में नहीं, वह हमारी ओर है।”

41जो कोई एक कटोरा पानी तुम्‍हें इसलिये पिलाए कि तुम मसीह के हो तो मैं तुम से सच कहता हूँ कि वह अपना प्रतिफल किसी रीति से न खोएगा।

42पर “जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर विश्‍वास करते हैं, किसी को ठोकर खिलाए तो उसके लिये भला यह है कि एक बड़ी चक्‍की का पाट उसके गले में लटकाया जाए और वह समुद्र में डाल दिया जाए।

43यदि तेरा हाथ तुझे ठोकर खिलाए तो उसे काट डाल टुण्‍डा होकर जीवन में प्रवेश करना, तेरे लिये इस से भला है कि दो हाथ रहते हुए नरक के बीच उस आग में डाला जाए जो कभी बुझने का नहीं।

44जहाँ उनका कीड़ा नहीं मरता और आग नहीं बुझती।

45और यदि तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए तो उसे काट डाल।

46लंगड़ा होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो पांव रहते हुए नरक में डाला जाए।

47और यदि तेरी आंख तुझे ठोकर खिलाए तो उसे निकाल डाल, काना होकर परमेश्‍वर के राज्‍य में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो आंख रहते हुए तू नरक में डाला जाए।

48जहाँ उनका कीड़ा नहीं मरता और आग नहीं बुझती।

49क्‍योंकि हर एक जन आग से नमकीन किया जाएगा।

50नमक अच्‍छा है, पर यदि नमक की नमकीनी जाती रहे, तो उसे किससे स्‍वादित करोगे? अपने में नमक रखो, और आपस में मेल मिलाप से रहो।”

Copyright © 2017 Bridge Connectivity Solutions. Released under the Creative Commons Attribution No Derivatives license 4.0.

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