Luke 232017

1तब सारी सभा उठकर उसे पीलातुस के पास ले गई।

2और वे यह कहकर उस पर दोष लगाने लगे, “हम ने इसे लोगों को बहकाते और कैसर को कर देने से मना करते, और अपने आप को मसीह, राजा कहते हुए सुना है।”

3पीलातुस ने उससे पूछा, “क्‍या तू यहूदियों का राजा है?” उसने उसे उत्तर दिया, “तू आप ही कह रहा है।”

4तब पीलातुस ने महायाजकों और लोगों से कहा, “मैं इस मनुष्‍य में कुछ दोष नहीं पाता।”

5पर वे और भी दृढ़ता से कहने लगे, “यह गलील से लेकर यहाँ तक सारे यहूदिया में उपदेश दे देकर लोगों को भड़कता है।”

6यह सुनकर पीलातुस ने पूछा, “क्‍या यह मनुष्‍य गलीली है?”

7और यह जानकर कि वह हेरोदेस की रियासत का है, उसे हेरोदेस के पास भेज दिया, क्‍योंकि उन दिनों में वह भी यरूशलेम में था।

8हेरोदेस यीशु को देखकर बहुत ही प्रसन्न हुआ, क्‍योंकि वह बहुत दिनों से उसको देखना चाहता था: इसलिये कि उसके विषय में सुना था, और उसका कुछ चिन्‍ह देखने की आशा रखता था।

9वह उसने बहुतेरी बातें पूछता रहा, पर उसने उसको कुछ भी उत्तर न दिया।

10और महायाजक और शास्‍त्री खड़े हुए तन मन से उस पर दोष लगाते रहे।

11तब हेरोदेस ने अपने सिपाहियों के साथ उसका अपमान करके ठट्ठों में उड़ाया, और भड़कीला वस्‍त्र पहनाकर उसे पीलातुस के पास लौटा दिया।

12उसी दिन पीलातुस और हेरोदेस मित्र हो गए। इसके पहले वे एक दूसरे के बैरी थे।

13पीलातुस ने महायाजकों और सरदारों और लोगों को बुलाकर उनसे कहा,

14“तुम इस मनुष्‍य को लोगों का बहकानेवाला ठहराकर मेरे पास लाए हो, और देखो, मैं ने तुम्‍हारे सामने उसकी जाँच की, पर जिन बातों का तुम उस पर दोष लगाते हो, उन बातों के विषय में मैं ने उसमें कुछ भी दोष नहीं पाया है;

15“न हेरोदेस ने, क्‍योंकि उसने उसे हमारे पास लौटा दिया है: और देखो, उससे ऐसा कुछ नहीं हुआ कि वह मृत्‍यु के दण्‍ड के योग्‍य ठहराया जाए।

16“इसलिये मैं उसे पिटवाकर छोड़ देता हूँ।”

17पिलातुस पर्व के समय उनके एक बन्‍दी को छोड़ने पर विवश था।

18तब सब मिलकर चिल्‍ला उठे, “इसका काम तमाम कर, और हमारे लिये बरअब्‍बा को छोड़ दे।”

19वह किसी बलवे के कारण जो नगर में हुआ था, और हत्‍या के कारण बन्‍दीगृह में डाला गया था।

20पर पीलातुस ने यीशु को छोड़ने की इच्‍छा से लोगों को फिर समझाया।

21परन्‍तु उन्होंने चिल्‍लाकर कहा, “उसे क्रूस पर चढ़ा, क्रूस पर!”

22उसने तीसरी बार उनसे कहा, “क्‍यों उसने कौन सी बुराई की है? मैं ने उसमें मृत्‍यु दण्‍ड के योग्‍य कोई बात नहीं पाई! इसलिये मैं उसे पिटवाकर छोड़ देता हूँ।”

23परन्‍तु वे चिल्‍ला-चिल्‍लाकर पीछे पड़ गए, कि वह क्रूस पर चढ़ाया जाए, और उन का चिल्‍लाना प्रबल हुआ।

24अतः पीलातुस ने आज्ञा दी, कि उनकी विनती के अनुसार किया जाए।

25और उसने उस मनुष्‍य को जो बलवे और हत्‍या के कारण बन्‍दीगृह में डाला गया था, और जिसे वे माँगते थे, छोड़ दिया; और यीशु को उनकी इच्‍छा के अनुसार सौंप दिया।।

26जब वे उसे लिए जा रहे थे, तो उन्होंने शमौन नाम एक कुरेनी को जो गाँव से आ रहा था, पकड़कर उस पर क्रूस को लाद दिया कि उसे यीशु के पीछे-पीछे ले चले।

27और लोगों की बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली: और बहुत सी स्त्रियाँ भी, जो उसके लिये छाती-पीटती और विलाप करती थीं।

28यीशु ने उनकी ओर फिरकर कहा, “हे यरूशलेम की पुत्रियो, मेरे लिये मत रोओ; परन्‍तु अपने और अपने बालकों के लिये रोओ।

29“क्‍योंकि देखो, वे दिन आते हैं, जिन में कहेंगे, ‘धन्‍य हैं वे जो बाँझ हैं, और वे गर्भ जो न जने और वे स्‍तन जिन्‍होंने दूध न पिलाया।’

30“उस समय ‘वे पहाड़ों से कहने लगेंगे, कि हम पर गिरो, और टीलों से कि हमें ढाँप लो।’

31“क्‍योंकि जब वे हरे पेड़ के साथ ऐसा करते हैं, तो सूखे के साथ क्‍या कुछ न किया जाएगा?”

32वे और दो मनुष्‍यों को भी जो कुकर्मी थे उसके साथ घात करने को ले चले।

33जब वे उस जगह जिसे खोपड़ी कहते हैं पहुँचे, तो उन्होंने वहाँ उसे और उन कुकर्मियों को भी एक को दाहिनी और और दूसरे को बाईं और क्रूसों पर चढ़ाया।

34तब यीशु ने कहा, “हे पिता, इन्‍हें क्षमा कर, क्‍योंकि ये जानते नहीं कि क्‍या कर रहें हैं?” और उन्होंने चिट्ठियाँ डालकर उसके कपड़े बाँट लिए।

35लोग खड़े-खड़े देख रहे थे, और सरदार भी ठट्ठा कर-करके कहते थे, कि इस ने औरों को बचाया, यदि यह परमेश्‍वर का मसीह है, और उसका चुना हुआ है, तो अपने आप को बचा ले।

36सिपाही भी पास आकर और सिरका देकर उसका ठट्ठा करके कहते थे।

37“यदि तू यहूदियों का राजा है, तो अपने आप को बचा!”

38और उसके ऊपर एक दोष पत्र भी लगा था: “यह यहूदियों का राजा है।”

39जो कुकर्मी लटकाए गए थे, उनमें से एक ने उसकी निन्‍दा करके कहा, “क्‍या तू मसीह नहीं? तो फिर अपने आप को और हमें बचा!”

40इस पर दूसरे ने उसे डाँटकर कहा, “क्‍या तू परमेश्‍वर से भी नहीं डरता? तू भी तो वही दण्‍ड पा रहा है,

41“और हम तो न्‍यायानुसार दण्‍ड पा रहे हैं, क्‍योंकि हम अपने कामों का ठीक फल पा रहे हैं; पर इस ने कोई अनुचित काम नहीं किया।”

42तब उसने कहा, “हे यीशु, जब तू अपने राज्‍य में आए, तो मेरी सुधि लेना।”

43उसने उससे कहा, “मै तुझ से सच कहता हूँ कि आज ही तू मेरे साथ स्‍वर्गलोक में होगा।”

44और लगभग दो पहर से तीसरे पहर तक सारे देश में अन्‍धियारा छाया रहा,

45और सूर्य का उजियाला जाता रहा, और मन्‍दिर का पर्दा बीच से फट गया,

46और यीशु ने बड़े शब्‍द से पुकार कर कहा, “हे पिता, मै अपनी आत्‍मा तेरे हाथों में सौंपत हूँ।” और यह कहकर प्राण छोड़ दिए।

47सूबेदार ने, जो कुछ हुआ था देखकर परमेश्‍वर की बड़ाई की, और कहा, “निश्‍चय यह मनुष्‍य धर्मी था।”

48और भीड़ जो यह देखने को इकट्ठी हुई थी, इस घटना को देखकर छाती पीटती हुई लौट गई।

49और उसके सब जान पहचान, और जो स्त्रियाँ गलील से उसके साथ आई थीं, दूर खड़ी हुई यह सब देख रही थीं।

50और देखो यूसुफ नामक महासभा का एक सदस्य था जो सज्‍जन और धर्मी पुरुष था।

51और उनके विचार और उनके इस काम से प्रसन्न न था; और वह यूहदियों के नगर अरिमतिया का रहने वाला और परमेश्‍वर के राज्‍य की बाट जोहने वाला था।

52उसने पीलातुस के पास जाकर यीशु का शव माँगा,

53और उसे उतारकर मलमल की चादर में लपेटा, और एक कब्र में रखा, जो चट्टान में खोदी हुई थी; और उसमें कोई कभी न रखा गया था।

54वह तैयारी का दिन था, और सब्‍त का दिन आरम्‍भ होने पर था।

55और उन स्त्रियों ने जो उसके साथ गलील से आई थीं, पीछे-पीछॆ, जाकर उस कब्र को देखा और यह भी कि उसका शव किस रीति से रखा गया हैं।

56और लौटकर सुगन्धित वस्तुएँ और इत्र तैयार किया; और सब्‍त के दिन तो उन्होंने आज्ञा के अनुसार विश्राम किया।

Copyright © 2017 Bridge Connectivity Solutions. Released under the Creative Commons Attribution No Derivatives license 4.0.

Choose Translation

Switch translation for Luke 23.

Reading Settings

Paragraph viewDisplay verses as flowing paragraphs instead of individual lines
Show verse numbersDisplay verse numbers inline
Red letterHighlight the words of Christ in red

Sign in to save your reading preferences across sessions.