John 192017

1इस पर पीलातुस ने यीशु को लेकर कोड़े लगवाए।

2और सिपाहियों ने काँटों का मुकुट गुँथकर उसके सिर पर रखा, और उसे बैंजनी वस्‍त्र पहिनाया,

3और उसके पास आ आकर कहने लगे, “हे यहूदियों के राजा, प्रणाम!” और उसे थप्‍पड़ मारे।

4तब पीलातुस ने फिर बाहर निकलकर लोगों से कहा, “देखो, मैं उसे तुम्‍हारे पास फिर बाहर लाता हूँ; ताकि तुम जानो कि मैं कुछ भी दोष नहीं पाता।”

5तब यीशु काँटों का मुकुट और बैंजनी वस्‍त्र पहिने हुए बाहर निकला और पीलातुस ने उनसे कहा, “देखो, यह पुरूष।”

6जब महायाजकों और प्‍यादों ने उसे देखा, तो चिल्‍लाकर कहा, “उसे क्रूस पर चढ़ा, क्रूस पर!” पीलातुस ने उनसे कहा, “तुम ही उसे लेकर क्रूस पर चढ़ाओ; क्‍योंकि मैं उसमें दोष नहीं पाता।”

7यहूदियों ने उसको उत्तर दिया, “हमारी भी व्‍यवस्‍था है और उस व्‍यवस्‍था के अनुसार वह मारे जाने के योग्‍य है क्‍योंकि उसने अपने आप को परमेश्‍वर का पुत्र बनाया।”

8जब पीलातुस ने यह बात सुनी तो और भी डर गया।

9और फिर किले के भीतर गया और यीशु से कहा, “तू कहाँ का है?” परन्‍तु यीशु ने उसे कुछ भी उत्तर न दिया।

10पीलातुस ने उससे कहा, “मुझ से क्‍यों नहीं बोलता? क्‍या तू नहीं जानता कि तुझे छोड़ देने का अधिकार मुझे है और तुझे क्रूस पर चढ़ाने का भी मुझे अधिकार है।”

11यीशु ने उत्तर दिया, “यदि तुझे ऊपर से न दिया जाता, तो तेरा मुझ पर कुछ अधिकार न होता; इसलिये जिस ने मुझे तेरे हाथ पकड़वाया है, उसका पाप अधिक है।”

12इस से पीलातुस ने उसे छोड़ देना चाहा, परन्‍तु यहूदियों ने चिल्‍ला चिल्‍लाकर कहा, “यदि तू इस को छोड़ देगा तो तेरी भक्ति कैसर की ओर नहीं; जो कोई अपने आप को राजा बनाता है वह कैसर का साम्‍हना करता है।”

13ये बातें सुनकर पीलातुस यीशु को बाहर लाया और उस जगह एक चबूतरा था जो इब्रानी में ‘गब्‍बता’ कहलाता है, और न्‍याय आसन पर बैठा।

14यह फसह की तैयारी का दिन था और छठे घंटे के लगभग था: तब उसने यहूदियों से कहा, “देखो, यही है, तुम्‍हारा राजा!”

15परन्‍तु वे चिल्‍लाए, “ले जा! ले जा! उसे क्रूस पर चढ़ा!” पीलातुस ने उनसे कहा, “क्‍या मैं तुम्‍हारे राजा को क्रूस पर चढ़ाऊँ?” महायाजकों ने उत्तर दिया, “कैसर को छोड़ हमारा और कोई राजा नहीं।”

16तब उसने उसे उनके हाथ सौंप दिया ताकि वह क्रूस पर चढ़ाया जाए।

17तब वे यीशु को ले गए। और वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्‍थान तक बाहर गया, जो ‘खोपड़ी का स्‍थान’ कहलाता है और इब्रानी में ‘गुलगुता’।

18वहाँ उन्होंने उसे और उसके साथ और दो मनुष्‍यों को क्रूस पर चढ़ाया, एक को इधर और एक को उधर, और बीच में यीशु को।

19और पीलातुस ने एक दोष-पत्र लिखकर क्रूस पर लगा दिया और उसमें यह लिखा हुआ था, “यीशु नासरी यहूदियों का राजा।”

20यह दोष-पत्र बहुत यहूदियों ने पढ़ा क्‍योंकि वह स्‍थान जहाँ यीशु क्रूस पर चढ़ाया गया था नगर के पास था और पत्र इब्रानी और लतीनी और यूनानी में लिखा हुआ था।

21तब यहूदियों के महायाजकों ने पीलातुस से कहा, “‘यहूदियों का राजा’ मत लिख परन्‍तु यह कि ‘उसने कहा, मैं यहूदियों का राजा हूँ’।”

22पीलातुस ने उत्तर दिया, “मैं ने जो लिख दिया, वह लिख दिया।”

23जब सिपाही यीशु को क्रूस पर चढ़ा चुके, तो उसके कपड़े लेकर चार भाग किए, हर सिपाही के लिये एक भाग और कुरता भी लिया, परन्‍तु कुरता बिन सीअन ऊपर से नीचे तक बुना हुआ था:

24इसलिये उन्होंने आपस में कहा, “हम इस को न फाडें, परन्‍तु इस पर चिट्ठी डालें कि वह किस का होगा।” यह इसलिये हुआ, कि पवित्र शास्‍त्र की बात पूरी हो, “उन्होंने मेरे कपड़े आपस में बाँट लिए और मेरे वस्‍त्र पर चिट्ठी डाली।”

25सो सिपाहियों ने ऐसा ही किया। परन्‍तु यीशु के क्रूस के पास उसकी माता और उसकी माता की बहिन मरियम, क्‍लोपास की पत्‍नी और मरियम मगदलीनी खड़ी थी।

26यीशु ने अपनी माता और उस चेले को जिस से वह प्रेम रखता था पास खड़े देखकर अपनी माता से कहा, “हे नारी, देख, यह तेरा पुत्र है।”

27तब उस चेले से कहा, “यह तेरी माता है।” और उसी समय से वह चेला, उसे अपने घर ले गया।

28इस के बाद यीशु ने यह जानकर कि अब सब कुछ हो चुका; इसलिये कि पवित्र शास्‍त्र की बात पूरी हो कहा, “मैं प्‍यासा हूँ।”

29वहाँ एक सिरके से भरा हुआ बर्तन धरा था, सो उन्होंने सिरके के भिगोए हुए इस्‍पंज को जूफे पर रखकर उसके मुँह से लगाया।

30जब यीशु ने वह सिरका लिया, तो कहा, “पूरा हुआ”; और सिर झुकाकर प्राण त्‍याग दिए।

31और इसलिये कि वह तैयारी का दिन था, यहूदियों ने पीलातुस से विनती की कि उनकी टांगे तोड़ दी जाएँ और वे उतारे जाएँ ताकि सब्‍त के दिन वे क्रूसों पर न रहें, क्‍योंकि वह सब्‍त का दिन बड़ा दिन था।

32सो सिपाहियों ने आकर पहले की टांगें तोड़ीं तब दूसरे की भी, जो उसके साथ क्रूसों पर चढ़ाए गए थे।

33परन्‍तु जब यीशु के पास आकर देखा कि वह मर चुका है, तो उसकी टांगें न तोड़ीं।

34परन्‍तु सिपाहियों में से एक ने बरछे से उसका पंजर बेधा और उसमें से तुरन्‍त लोहू और पानी निकला।

35जिस ने यह देखा, उसी ने गवाही दी है, और उसकी गवाही सच्‍ची है; और वह जानता है, कि सच कहता है कि तुम भी विश्‍वास करो।

36ये बातें इसलिये हुईं कि पवित्र शास्‍त्र की यह बात पूरी हो, “उसकी कोई हड्डी तोड़ी न जाएगी।”

37फिर एक और स्‍थान पर यह लिखा है, “जिसे उन्होंने बेधा है, उस पर दृष्‍टि करेंगे।”

38इन बातों के बाद अरमतियाह के यूसुफ ने, जो यीशु का चेला था, (परन्‍तु यहूदियों के डर से इस बात को छिपाए रखता था), पीलातुस से विनती की, कि मैं यीशु की लोथ को ले जाऊँ, और पीलातुस ने उसकी विनती सुनी, और वह आकर उसकी लोथ ले गया।

39निकुदेमुस भी जो पहले यीशु के पास रात को गया था पचास सेर के लगभग मिला हुआ गन्‍धरस और एलवा ले आया।

40तब उन्होंने यीशु की लोथ को लिया और यहूदियों के गाड़ने की रीति के अनुसार उसे सुगन्‍ध द्रव्‍य के साथ कफन में लपेटा।

41उस स्‍थान पर जहाँ यीशु क्रूस पर चढ़ाया गया था, एक बारी थी; और उस बारी में एक नई कब्र थी; जिसमें कभी कोई न रखा गया था।

42सो यहूदियों की तैयारी के दिन के कारण, उन्होंने यीशु को उसी में रखा, क्‍योंकि वह कब्र निकट थी।

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