John 102017

1“मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि जो कोई द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, परन्‍तु और किसी ओर से चढ़ जाता है, वह चोर और डाकू है।

2परन्‍तु जो द्वार से भीतर प्रवेश करता है वह भेड़ों का चरवाहा है।

3उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेंड़ें उसका शब्‍द सुनती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है और बाहर ले जाता है।

4और जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उनके आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं; क्‍योंकि वे उसका शब्‍द पहचानती हैं।

5परन्‍तु वे पराये के पीछे नहीं जाएँगी, परन्‍तु उससे भागेंगी, क्‍योंकि वे परायों का शब्‍द नहीं पहचानती।”

6यीशु ने उनसे यह दृष्‍टान्‍त कहा, परन्‍तु वे न समझे कि ये क्‍या बातें हैं जो वह हम से कहता है।

7तब यीशु ने उनसे फिर कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि भेड़ों का द्वार मैं हूँ।

8जितने मुझ से पहले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्‍तु भेड़ों ने उनकी न सुनी।

9द्वार मैं हूँ: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा।

10चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्‍तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएँ।

11अच्‍छा चरवाहा मैं हूँ; अच्‍छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है।

12मजदूर जो न चरवाहा है, और न भेड़ों का मालिक है, भेडि़ए को आते हुए देख, भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है, और भेडि़या उन्‍हें पकड़ता और तित्तर बित्तर कर देता है।

13वह इसलिये भाग जाता है कि वह मजदूर है, और उसको भेड़ों की चिन्‍ता नहीं।

14अच्‍छा चरवाहा मैं हूँ; मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं।

15जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूँ। और मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूँ।

16और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उन का भी लाना अवश्‍य है, वे मेरा शब्‍द सुनेंगी; तब एक ही झुण्‍ड और एक ही चरवाहा होगा।

17पिता इसलिये मुझ से प्रेम रखता है, कि मैं अपना प्राण देता हूँ, कि उसे फिर ले लूं।

18कोई उसे मुझ से छीनता नहीं, वरन मैं उसे आप ही देता हूँ: मुझे उसके देने का अधिकार है, और उसे फिर लेने का भी अधिकार है: यह आज्ञा मेरे पिता से मुझे मिली है।

19इन बातों के कारण यहूदियों में फिर फूट पड़ी।

20उनमें से बहुतेरे कहने लगे, “उसमें दुष्‍टात्‍मा है, और वह पागल है; उसकी क्‍यों सुनते हो?”

21औरों ने कहा, “ये बाते ऐसे मनुष्‍य की नहीं जिसमें दुष्‍टात्‍मा हो: क्‍या दुष्‍टात्‍मा अन्‍धों की आँखे खोल सकती है?”

22यरूशलेम में स्‍थापन पर्व हुआ, और जाड़े की ऋतु थी।

23और यीशु मन्‍दिर में सुलैमान के ओसारे में टहल रहा था।

24तब यहूदियों ने उसे आ घेरा और पूछा, “तू हमारे मन को कब तक दुविधा में रखेगा? यदि तू मसीह है, तो हम से साफ कह दे।”

25यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, “मैं ने तुम से कह दिया, और तुम प्रतीति करते ही नहीं, जो काम मैं अपने पिता के नाम से करता हूँ वे ही मेरे गवाह हैं।

26परन्‍तु तुम इसलिये प्रतीति नहीं करते, कि मेरी भेड़ों में से नहीं हो।

27मेरी भेड़ें मेरा शब्‍द सुनती हैं, और मैं उन्‍हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं।

28और मैं उन्‍हें अनन्‍त जीवन देता हूँ, और वे कभी नाश नहीं होंगी, और कोई उन्‍हें मेरे हाथ से छीन न लेगा।

29मेरा पिता, जिस ने उन्‍हें मुझ को दिया है, सब से बड़ा है, और कोई उन्‍हें पिता के हाथ से छीन नहीं सकता।

30मैं और पिता एक हैं।”

31यहूदियों ने उसे पत्‍थरवाह करने को फिर पत्‍थर उठाए।

32इस पर यीशु ने उनसे कहा, “मैं ने तुम्‍हें अपने पिता की ओर से बहुत से भले काम दिखाए हैं, उन में से किस काम के लिये तुम मुझे पत्‍थरवाह करते हो?”

33यहूदियों ने उसको उत्तर दिया, “भले काम के लिये हम तुझे पत्‍थरवाह नहीं करते, परन्‍तु परमेश्‍वर की निन्‍दा के कारण और इसलिये कि तू मनुष्‍य होकर अपने आप को परमेश्‍वर बनाता है।”

34यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, “क्‍या तुम्‍हारी व्‍यवस्‍था में नहीं लिखा है कि ‘मैंने कहा, तुम ईश्‍वर हो’?

35यदि उसने उन्‍हें ईश्‍वर कहा जिन के पास परमेश्‍वर का वचन पहुंचा (और पवित्र शास्‍त्र की बात लोप नहीं हो सकती।)

36तो जिसे पिता ने पवित्र ठहराकर जगत में भेजा है, तुम उससे कहते हो, ‘तू निन्‍दा करता है,’ इसलिये कि मैं ने कहा, ‘मैं परमेश्‍वर का पुत्र हूँ’।

37यदि मैं अपने पिता के काम नहीं करता, तो मेरी प्रतीति न करो।

38परन्‍तु यदि मैं करता हूँ, तो चाहे मेरी प्रतीति न भी करो, परन्‍तु उन कामों की तो प्रतीति करो, ताकि तुम जानो, और समझो, कि पिता मुझ में है, और मैं पिता में हूँ।”

39तब उन्होंने फिर उसे पकड़ने का प्रयत्‍न किया परन्‍तु वह उनके हाथ से निकल गया।

40फिर वह यरदन के पार उस स्‍थान पर चला गया, जहाँ यूहन्‍ना पहले बपतिस्‍मा दिया करता था, और वहीं रहा।

41और बहुतेरे उसके पास आकर कहते थे, “युहन्‍ना ने तो कोई चिन्‍ह नहीं दिखाया, परन्‍तु जो कुछ यूहन्‍ना ने इस के विषय में कहा था वह सब सच था।”

42और वहाँ बहुतेरों ने उस पर विश्‍वास किया।

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