James 52017

1हे धनवानों सुन तो लो; तुम अपने आनेवाले क्‍लेशों पर चिल्‍लाकर रोओ।

2तुम्‍हारा धन बिगड़ गया और तुम्‍हारे वस्‍त्रों को कीड़े खा गए।

3तुम्‍हारे सोने-चाँदी में काई लग गई है; और वह काई तुम पर गवाही देगी, और आग की नाई तुम्‍हारा मांस खा जाएगी: तुम ने अन्‍तिम युग में धन बटोरा है।

4देखो, जिन मजदूरों ने तुम्‍हारे खेत काटे, उनकी वह मजदूरी जो तुम ने धोखा देकर रख ली है चिल्‍ला रही है, और लवनेवालों की दोहाई, सेनाओं के प्रभु के कानों तक पहूँच गई है।

5तुम पृथ्‍वी पर भोग-विलास में लगे रहे और बड़ा ही सुख भोगा; तुम ने इस वध के दिन के लिये अपने हृदय का पालन-पोषण करके मोटा ताजा किया।

6तुम ने धर्मी को दोषी ठहराकर मार डाला; वह तुम्‍हारा सामना नहीं करता।

7सो हे भाइयों, प्रभु के आगमन तक धीरज धरो, देखो, गृहस्थ पृथ्‍वी के बहुमूल्‍य फल की आशा रखता हुआ प्रथम और अन्‍तिम वर्षा होने तक धीरज धरता है।

8तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्‍योंकि प्रभु का शुभागमन निकट है।

9हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, हाकिम द्वार पर खड़ा है।

10हे भाइयो, जिन भविष्‍यद्वक्‍ताओं ने प्रभु के नाम से बातें की, उन्‍हें दुख उठाने और धीरज धरने का एक आदर्श समझो।

11देखो, हम धीरज धरनेवालों को धन्‍य कहते हैं: तुम ने अय्यूब के धीरज के विषय में तो सुना ही है, और प्रभु की ओर से जो उसका प्रतिफल हुआ उसे भी जान लिया है, जिस से प्रभु की अत्‍यन्‍त करूणा और दया प्रगट होती है।

12पर हे मेरे भाइयों, सब से श्रेष्‍ठ बात यह है, कि शपथ न खाना; न स्‍वर्ग की न पृथ्‍वी की, न किसी और वस्‍तु की, पर तुम्‍हारी बातचीत हां की हां, और नहीं की नहीं हो, कि तुम दण्‍ड के योग्‍य न ठहरो।

13यदि तुम में कोई दुखी हो तो वह प्रार्थना करे: यदि आनन्‍दित हो, तो वह स्‍तुति के भजन गाए।

14यदि तुम में कोई रोगी हो, तो कलीसिया के प्राचीनों को बुलाए, और वे प्रभु के नाम से उस पर तेल मल कर उसके लिये प्रार्थना करें।

15और विश्‍वास की प्रार्थना के द्वारा रोगी बच जाएगा और प्रभु उसको उठाकर खड़ा करेगा; और यदि उसने पाप भी किए हों, तो उनकी भी क्षमा हो जाएगी।

16इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के सामने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिससे चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है।

17एलिय्‍याह भी तो हमारे समान दुख-सुख भोगी मनुष्‍य था; और उसने गिड़गिड़ा कर प्रार्थना की; कि मेंह न बरसे; और साढ़े तीन वर्ष तक भूमि पर मेंह नहीं बरसा।

18फिर उसने प्रार्थना की, तो आकाश से वर्षा हुई, और भूमि फलवन्‍त हुई।

19हे मेरे भाइयों, यदि तुम में कोई सत्‍य के मार्ग से भटक जाए, और कोई उसको फेर लाए।

20तो वह यह जान ले, कि जो कोई किसी भटके हुए पापी को फेर लाएगा, वह एक प्राण को मृत्‍यु से बचाएगा, और अनेक पापों पर परदा डालेगा।

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