Hebrews 92017

1निदान, उस पहिली वाचा में भी सेवा के नियम थे; और ऐसा पवित्रस्‍थान जो इस जगत का था।

2अर्थात् एक तम्‍बू बनाया गया, पहले तम्‍बू में दीवट, और मेज, और भेंट की रोटियाँ थी; और वह पवित्रस्‍थान कहलाता है।

3और दूसरे परदे के पीछे वह तम्‍बू था, जो परम पवित्रस्‍थान कहलाता है।

4उस में सोने की धूपदानी, और चारों ओर सोने से मढ़ा हुआ वाचा का संदूक और इस में मन्ना से भरा हुआ सोने का मर्तबान और हारून की छड़ी जिस में फूल फल आ गए थे और वाचा की पटियाँ थीं।

5और उसके ऊपर दोनों तेजोमय करूब थे, जो प्रायश्चित के ढकने पर छाया किए हुए थे: इन्‍हीं का एक एक करके वर्णन करने का अभी अवसर नहीं है।

6जब ये वस्‍तुएँ इस रीति से तैयार हो चुकी, तक पहले तम्‍बू में तो याजक हर समय प्रवेश करके सेवा के काम निबाहते हैं

7पर दूसरे में केवल महायाजक वर्ष भर में एक ही बार जाता है; और बिना लहू लिये नहीं जाता; जिसे वह अपने लिये और लोगों की भूल चूक के लिये चढ़ावा चढ़ाता है।

8इस से पवित्र आत्‍मा यही दिखाता है, कि जब तक पहिला तम्‍बू खड़ा है, तब तक पवित्रस्‍थान का मार्ग प्रगट नहीं हुआ।

9और यह तम्‍बू तो वर्तमान समय के लिये एक दृष्‍टान्‍त है; जिस में ऐसी भेंट और बलिदान चढ़ाए जाते हैं, जिन से आराधना करनेवालों के विवेक सिद्ध नहीं हो सकते।

10इसलिये कि वे केवल खाने पीने की वस्‍तुओं, और भांति भांति के स्‍नान विधि के आधार पर शारीरिक नियम हैं, जो सुधार के समय तक के लिये नियुक्‍त किए गए हैं।

11परन्‍तु जब मसीह आनेवाली अच्‍छी अच्‍छी वस्‍तुओं का महायाजक होकर आया, तो उसने और भी बड़े और सिद्ध तम्‍बू से होकर जो हाथ का बनाया हुआ नहीं, अर्थात् सृष्‍टि का नहीं।

12और बकरों और बछड़ों के लहू के द्वारा नहीं, पर अपने ही लहू के द्वारा एक ही बार पवित्र स्‍थान में प्रवेश किया, और अनन्‍त छुटकारा प्राप्‍त किया।

13क्‍योंकि जब बकरों और बैलों का लहू और कलोर की राख अपवित्र लोगों पर छिड़के जाने से शरीर की शुद्धता के लिये पवित्र करती है।

14तो मसीह का लहू जिस ने अपने आप को सनातन आत्‍मा के द्वारा परमेश्‍वर के सामने निर्दोष चढ़ाया, तुम्‍हारे विवेक को मरे हुए कामों से क्‍यों न शुद्ध करेगा, ताकि तुम जीवते परमेश्‍वर की सेवा करो।

15और इसी कारण वह नई वाचा का मध्‍यस्‍थ है, ताकि उस मृत्‍यु के द्वारा जो पहिली वाचा के समय के अपराधों से छुटकारा पाने के लिये हुई है, बुलाए हुए लोग प्रतिज्ञा के अनुसार अनन्‍त मीरास को प्राप्‍त करें।

16क्‍योंकि जहाँ वाचा बान्‍धी गई है वहाँ वाचा बान्‍धनेवाले की मृत्‍यु का समझ लेना भी अवश्‍य है।

17क्‍योंकि ऐसी वाचा मरने पर पक्‍की होती है, और जब तक वाचा बान्‍धनेवाला जीवित रहता है, तब तक वाचा काम की नहीं होती।

18इसी लिये पहिली वाचा भी बिना लहू के नहीं बान्‍धी गई।

19क्‍योंकि जब मूसा सब लोगों को व्‍यवस्‍था की हर एक आज्ञा सुना चुका, तो उसने बछड़ों और बकरों का लहू लेकर, पानी और लाल ऊन, और जूफा के साथ, उस पुस्‍तक पर और सब लोगों पर छिड़क दिया।

20और कहा, “यह उस वाचा का लहू है, जिस की आज्ञा परमेश्‍वर ने तुम्‍हारे लिये दी है।”

21और इसी रीति से उसने तम्‍बू और सेवा के सारे सामान पर लहू छिड़का।

22और व्‍यवस्‍था के अनुसार प्राय: सब वस्‍तुएँ लहू के द्वारा शुद्ध की जाती हैं; और बिना लहू बहाए क्षमा नहीं होती।

23इसलिये अवश्‍य है, कि स्‍वर्ग में की वस्‍तुओं के प्रतिरूप इन के द्वारा शुद्ध किए जाएँ; पर स्‍वर्ग में की वस्‍तुएँ आप इन से उत्तम बलिदानों के द्वारा।

24क्‍योंकि मसीह ने उस हाथ के बनाए हुए पवित्र स्‍थान में जो सच्‍चे पवित्र स्‍थान का नमूना है, प्रवेश नहीं किया, पर स्‍वर्ग ही में प्रवेश किया, ताकि हमारे लिये अब परमेश्‍वर के सामने दिखाई दे।

25यह नहीं कि वह अपने आप को बार बार चढ़ाए, जैसा कि महायाजक प्रति वर्ष दूसरे का लहू लिये पवित्रस्‍थान में प्रवेश किया करता है।

26नहीं तो जगत की उत्‍पत्ति से लेकर उस को बार बार दु:ख उठाना पड़ता; पर अब युग के अन्‍त में वह एक बार प्रगट हुआ है, ताकि अपने ही बलिदान के द्वारा पाप को दूर कर दे।

27और जैसे मनुष्‍यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्‍याय का होना नियुक्‍त है।

28वैसे ही मसीह भी बहुतों के पापों को उठा लेने के लिये एक बार बलिदान हुआ और जो लोग उस की बाट जोहते हैं, उन के उद्धार के लिये दूसरी बार बिना पाप के दिखाई देगा।

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