Galatians 52017

1मसीह ने स्‍वतंत्रता के लिये हमें स्‍वतंत्र किया है; सो इसी में स्‍थिर रहो, और दासत्‍व के जूए में फिर से न जुतो।

2देखो, मैं पौलुस तुम से कहता हूँ, कि यदि खतना कराओगे, तो मसीह से तुम्‍हें कुछ लाभ न होगा।

3फिर भी मैं हर एक खतना करानेवाले को जताए देता हूँ, कि उसे सारी व्‍यवस्‍था माननी पड़ेगी।

4तुम जो व्‍यवस्‍था के द्वारा धर्मी ठहरना चाहते हो, मसीह से अलग और अनुग्रह से गिर गए हो।

5क्‍योंकि आत्‍मा के कारण, हम विश्‍वास से, आशा की हुई धार्मिकता की बाट जोहते हैं।

6और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारहित कुछ काम का है, परन्‍तु केवल विश्‍वास का जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है।

7तुम तो भली भाँति दौड रहे थे, अब किस ने तुम्‍हें रोक दिया, कि सत्‍य को न मानो।

8ऐसी सीख तुम्‍हारे बुलानेवाले की ओर से नहीं।

9थोड़ा सा खमीर सारे गूँधे हुए आटे को खमीर कर डालता है।

10मैं प्रभु पर तुम्‍हारे विषय में भरोसा रखता हूँ, कि तुम्‍हारा कोई दूसरा विचार न होगा; परन्‍तु जो तुम्‍हें घबरा देता है, वह कोई क्‍यों न हो दण्‍ड पाएगा।

11परन्‍तु हे भाइयो, यदि मैं अब तक खतना का प्रचार करता हूँ, तो क्‍यों अब तक सताया जाता हूँ; फिर तो क्रूस की ठोकर जाती रही।

12भला होता, कि जो तुम्‍हें डाँवाँडोल करते हैं, वे अपना अंग ही काट डालते!

13हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्‍तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन् प्रेम से एक दूसरे के दास बनो।

14क्‍योंकि सारी व्‍यवस्‍था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, “तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।”

15पर यदि तुम एक दूसरे को दाँत से काटते और फाड़ खाते हो, तो चौकस रहो, कि एक दूसरे का सत्‍यानाश न कर दो।

16पर मैं कहता हूँ, आत्‍मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे।

17क्‍योंकि शरीर आत्‍मा के विरोध में और आत्‍मा शरीर के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।

18और यदि तुम आत्‍मा के चलाए चलते हो तो व्‍यवस्‍था के आधीन न रहे।

19शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात् व्‍यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन।

20मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म।

21डाह, मलवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के ऐसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहले से कह देता हूँ जैसा पहले कह भी चुका हूँ, कि ऐसे ऐसे काम करनेवाले परमेश्‍वर के राज्‍य के वारिस न होंगे।

22पर आत्‍मा का फल प्रेम, आनन्‍द, मेल, धीरज,

23और कृपा, भलाई, विश्‍वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई व्‍यवस्‍था नहीं।

24और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उसकी लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।

25यदि हम आत्‍मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्‍मा के अनुसार चलें भी।

26हम घमण्‍डी होकर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें।

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