Galatians 12017

1पौलुस की, जो न मनुष्‍यों की ओर से, और न मनुष्‍य के द्वारा, वरन् यीशु मसीह और परमेश्‍वर पिता के द्वारा, जिस ने मरे हुओं में से जिलाया, प्रेरित है।

2और सारे भाइयों की ओर से, जो मेरे साथ हैं; गलातिया की कलीसियाओं के नाम।

3परमेश्‍वर पिता, और हमारे प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्‍हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।

4उसी ने अपने आप को हमारे पापों के लिये दे दिया, ताकि हमारे परमेश्‍वर और पिता की इच्‍छा के अनुसार हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ाए।

5उसकी स्‍तुति और बड़ाई। युगानुयुग होती रहे। आमीन।

6मुझे आश्‍चर्य होता है, कि जिस ने तुम्‍हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उससे तुम इतनी जल्‍दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे।

7परन्‍तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्‍हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं।

8परन्‍तु यदि हम या स्‍वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्‍हें सुनाए, तो स्रापित हो।

9जैसा हम पहले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूँ, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो स्रापित हो। अब मैं क्‍या मनुष्‍यों को मानता हूँ या परमेश्‍वर को? क्‍या मैं मनुष्‍यों को प्रसन्‍न करना चाहता हूँ?

10यदि मैं अब तक मनुष्‍यों को ही प्रसन्‍न करता रहता, तो मसीह का दास न होता।

11हे भाइयो, मैं तुम्‍हें जताए देता हूँ, कि जो सुसमाचार मैं ने सुनाया है, वह मनुष्‍य का नहीं।

12क्‍योंकि वह मुझे मनुष्‍य की ओर से नहीं पहुँचा, और न मुझे सिखाया गया, पर यीशु मसीह के प्रकाश से मिला।

13यहूदी मत में जो पहले मेरा चाल चलन था, तुम सुन चुके हो; कि मैं परमेश्‍वर की कलीसिया को बहुत ही सताता और नाश करता था।

14और अपने बहुत से जातिवालों से जो मेरी अवस्‍था के थे यहूदी मत में बढ़ता जाता था और अपने बापदादों के व्‍यवहारों में बहुत ही उत्तेजित था।

15परन्‍तु परमेश्‍वर की, जिस ने मेरी माता के गर्भ ही से मुझे ठहराया और अपने अनुग्रह से बुला लिया,

16जब इच्‍छा हुई, कि मुझ में अपने पुत्र को प्रगट करे कि मैं अन्‍यजातियों में उसका सुसमाचार सुनाऊँ; तो न मैं ने मांस और लोहू से सलाह ली;

17और न यरूशलेम को उनके पास गया जो मुझ से पहले प्रेरित थे, पर तुरन्‍त अरब को चला गया: और फिर वहाँ से दमिश्‍क को लौट आया।

18फिर तीन बरस के बाद मैं कैफा से भेंट करने के लिये यरूशलेम को गया, और उसके पास पन्‍द्रह दिन तक रहा।

19परन्‍तु प्रभु के भाई याकूब को छोड़ और प्रेरितों में से किसी से न मिला।

20जो बातें मैं तुम्‍हें लिखता हूँ, देखो परमेश्‍वर को उपस्‍थित जानकर कहता हूँ, कि वे झूठी नहीं।

21इस के बाद मैं सूरिया और किलिकिया के देशों में आया।

22परन्‍तु यहूदिया की कलीसियाओं ने जो मसीह में थी, मेरा मुहँ तो कभी नहीं देखा था।

23परन्‍तु यही सुना करती थीं, कि जो हमें पहले सताता था, वह अब उसी धर्म का सुसमाचार सुनाता है, जिसे पहले नाश करता था।

24और मेरे विषय में परमेश्‍वर की महिमा करती थीं।

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