Colossians 22017

1मैं चाहता हूँ कि तुम जान लो, कि तुम्‍हारे और उनके जो लौदीकिया में हैं, और उन सब के लिये जिन्‍हों ने मेरा शारीरिक मुँह नहीं देखा मैं कैसा परिश्रम करता हूँ।

2ताकि उनके मनों में शान्‍ति हो और वे प्रेम से आपस में गठे रहें, और वे पूरी समझ का सारा धन प्राप्‍त करें, और परमेश्‍वर पिता के भेद को अर्थात् मसीह को पहिचान लें।

3जिसमें बुद्धि और ज्ञान से सारे भण्‍डार छिपे हुए हैं।

4यह मैं इसलिये कहता हूँ, कि कोई मनुष्‍य तुम्‍हें लुभानेवाली बातों से धोखा न दे।

5क्‍योंकि मैं यदि शरीर के भाव से तुम से दूर हूँ, तौभी आत्‍मिक भाव से तुम्‍हारे निकट हूँ, और तुम्‍हारे विधि-अनुसार चरित्र और तुम्‍हारे विश्‍वास की जो मसीह में है दृढ़ता देखकर प्रसन्‍न होता हूँ।

6सो जैसे तुम ने मसीह यीशु को प्रभु करके ग्रहण कर लिया है, वैसे ही उसी में चलते रहो।

7और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ; और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्‍वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्‍यन्‍त धन्‍यवाद करते रहो।

8चौकस रहो कि कोई तुम्‍हें उस तत्‍व-ज्ञान और व्‍यर्थ धोखे के द्वारा अहेर न कर ले, जो मनुष्‍यों के परम्‍पराई मत और संसार की आदि शिक्षा के अनुसार है, पर मसीह के अनुसार नहीं।

9क्‍योंकि उसमें ईश्‍वरत्‍व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है।

10और तुम उसी में भरपूर हो गए हो जो सारी प्रधानता और अधिकार का शिरोमणि है।

11उसी में तुम्‍हारा ऐसा खतना हुआ है, जो हाथ से नहीं होता, अर्थात् मसीह का खतना, जिस से शारीरिक देह उतार दी जाती है।

12और उसी के साथ बपतिस्‍मा में गाड़े गए, और उसी में परमेश्‍वर की शक्ति पर विश्‍वास करके, जिस ने उसको मरे हुओं में से जिलाया, उसके साथ जी भी उठे।

13और उसने तुम्‍हें भी, जो अपने अपराधों, और अपने शरीर की खतनारहित दशा में मुर्दा थे, उसे साथ जिलाया, और हमारे सब अपराधों को क्षमा किया।

14और विधियों का वह लेख जो हमारे नाम पर और हमारे विरोध में था मिटा डाला; और उसको क्रूस पर कीलों से जड़कर साम्‍हने से हटा दिया है।

15और उसने प्रधानताओं और अधिकारों को अपने ऊपर से उतार कर उन का खुल्‍लमखुल्‍ला तमाशा बनाया और क्रूस के कारण उन पर जय-जय-कार की ध्वनी सुनाई।

16इसलिये खाने पीने या पर्व या नए चाँद, या सब्‍तों के विषय में तुम्‍हारा कोई फैसला न करे।

17क्‍योंकि ये सब आनेवाली बातों की छाया हैं, पर मूल वस्तुएँ मसीह की हैं।

18कोई मनुष्‍य दीनता और स्‍वर्गदूतों की पूजा करके तुम्‍हें दौड़ के प्रतिफल से वंचित न करे। ऐसा मनुष्‍य देखी हुई बातों में लगा रहता है और अपनी शारीरिक समझ पर व्‍यर्थ फूलता है।

19और उस शिरोमणि को पकड़े नहीं रहता जिस से सारी देह जोड़ों और पट्ठों के द्वारा पालन-पोषण पाकर और एक साथ गठकर, परमेश्‍वर की ओर से बढ़ती जाती है।

20जब कि तुम मसीह के साथ संसार की आदि शिक्षा की ओर से मर गए हो, तो फिर उनके समान जो संसार में जीवन बिताते हैं और ऐसी विधियों के वश में क्‍यों रहते हो?

21कि ‘यह न छूना,’ ‘उसे न चखना,’ और ‘उसे हाथ न लगाना’,

22(क्‍योंकि ये सब वस्‍तु काम में लाते लाते नाश हो जाएँगी) क्योंकि ये मनुष्यों की आज्ञाओं और शिक्षाओं के अनुसार है।

23इन विधियों में अपनी इच्‍छा के अनुसार गढ़ी हुई भक्ति की रीति, और दीनता, और शारीरिक अभ्यास के भाव से ज्ञान का नाम तो है, परन्‍तु शारीरिक लालसाओं को रोकने में इन से कुछ भी लाभ नहीं होता।

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