Acts 82017

1उसी दिन यरूशलेम की कलीसिया पर बड़ा उपद्रव होने लगा और प्रेरितों को छोड़ सब के सब यहूदिया और सामरिया देशों में तित्तर-बित्तर हो गए।

2और भक्‍तों ने स्‍तिफनुस को कब्र में रखा; और उसके लिये बड़ा विलाप किया।

3शाऊल कलीसिया को उजाड़ रहा था; और घर-घर घुसकर पुरूषों और स्‍त्रियों को घसीट-घसीटकर बन्‍दीगृह में डालता था।

4जो तित्तर-बित्तर हुए थे, वे सुसमाचार सुनाते हुए फिरे।

5और फिलिप्‍पुस सामरिया नगर में जाकर लोगों में मसीह का प्रचार करने लगा।

6जो बातें फिलिप्‍पुस ने कहीं उन्‍हें लोगों ने सुनकर और जो चिन्‍ह वह दिखाता था उन्‍हें देख-देखकर, एक चित्त होकर मन लगाया।

7क्‍योंकि बहुतों में से अशुद्ध आत्माएँ बड़े शब्‍द से चिल्‍लाती हुई निकल गई, और बहुत से लकवे के रोगी और लंगड़े भी अच्‍छे किए गए।

8और उस नगर में बड़ा आनन्‍द छा गया।

9इस से पहले उस नगर में शमौन नामक एक मनुष्‍य था, जो जादू-टोना करके सामरिया के लोगों को चकित करता और अपने आप को कोई बड़ा पुरूष बनाता था।

10और सब छोटे से बड़े तक उसका सम्मान कर कहते थे, “यह मनुष्‍य परमेश्वर की वह शक्ति है, जो महान कहलाती है।”

11उसने बहुत दिनों से उन्‍हें अपने जादू के कामों से चकित कर रखा था, इसीलिये वे उसको बहुत मानते थे।

12परन्‍तु जब उन्होंने फिलिप्‍पुस का विश्वास किया जो परमेश्‍वर के राज्‍य और यीशु के नाम का सुसमाचार सुनाता था तो लोग, क्‍या पुरूष, क्‍या स्‍त्री बपतिस्‍मा लेने लगे।

13तब शमौन ने स्वयं भी विश्वास किया और बपतिस्‍मा लेकर फिलिप्‍पुस के साथ रहने लगा और चिन्‍ह और बड़े-बड़े सामर्थ्य के काम होते देखकर चकित होता था।

14जब प्रेरितों ने जो यरूशलेम में थे सुना कि सामरियों ने परमेश्‍वर का वचन मान लिया है तो पतरस और यूहन्‍ना को उनके पास भेजा।

15और उन्होंने जाकर उनके लिये प्रार्थना की ताकि पवित्र आत्‍मा पाएँ।

16क्‍योंकि वह अब तक उनमें से किसी पर न उतरा था, उन्होंने तो केवल प्रभु यीशु के नाम में बपतिस्‍मा लिया था।

17तब उन्होंने उन पर हाथ रखे और उन्होंने पवित्र आत्‍मा पाया।

18जब शमौन ने देखा कि प्रेरितों के हाथ रखने से पवित्र आत्‍मा दिया जाता है, तो उनके पास रूपये लाकर कहा,

19“यह अधिकार मुझे भी दो, कि जिस किसी पर हाथ रखूँ, वह पवित्र आत्‍मा पाए।”

20पतरस ने उससे कहा, “तेरे रूपये तेरे साथ नाश हों, क्‍योंकि तूने परमेश्‍वर का दान रूपयों से मोल लेने का विचार किया।

21इस बात में न तेरा हिस्‍सा है, न भाग; क्‍योंकि तेरा मन परमेश्‍वर के आगे सीधा नहीं।

22इसलिये अपनी इस बुराई से मन फिराकर प्रभु से प्रार्थना कर, सम्‍भव है तेरे मन का विचार क्षमा किया जाए।

23क्‍योंकि मैं देखता हूँ, कि तू पित्त की सी कड़वाहट और अधर्म के बन्‍धन में पड़ा है।”

24शमौन ने उत्तर दिया, “तुम मेरे लिये प्रभु से प्रार्थना करो कि जो बातें तुमने कहीं, उनमें से कोई मुझ पर न आ पड़े।”

25अतः वे गवाही देकर और प्रभु का वचन सुनाकर, यरूशलेम को लौट गए, और सामरियों के बहुत से गाँवों में सुसमाचार सुनाते गए।

26फिर प्रभु के एक स्‍वर्गदूत ने फिलिप्‍पुस से कहा, “उठकर दक्षिण की ओर उस मार्ग पर जा, जो यरूशलेम से गाजा को जाता है। यह रेगिस्तानी मार्ग है।

27वह उठकर चल दिया, और देखो, कूश देश का एक मनुष्‍य आ रहा था जो खोजा और कूशियों की रानी कन्‍दाके का मन्‍त्री और खजांची था, और आराधना करने को यरूशलेम आया था।

28और वह अपने रथ पर बैठा हुआ था, और यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता की पुस्‍तक पढ़ता हुआ लौटा जा रहा था।

29तब आत्‍मा ने फिलिप्‍पुस से कहा, “निकट जाकर इस रथ के साथ हो ले।”

30फिलिप्‍पुस उसकी ओर दौड़ा और उसे यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता की पुस्‍तक पढ़ते हुए सुना, और पूछा, “तू जो पढ़ रहा है क्‍या उसे समझता भी है?”

31उसने कहा, “जब तक कोई मुझे न समझाए तो मैं कैसे समझूँ?” और उसने फिलिप्‍पुस से विनती की, कि चढ़कर मेरे पास बैठ।

32पवित्र शास्‍त्र का जो अध्‍याय वह पढ़ रहा था, वह यह था: “वह भेड़ के समान वध होने को पहुँचाया गया, और जैसा मेम्‍ना अपने ऊन कतरनेवालों के सामने चुपचाप रहता है, वैसे ही उसने भी अपना मुँह न खोला,

33उसकी दीनता में उसका न्‍याय होने नहीं पाया, और उसके समय के लोगों का वर्णन कौन करेगा? क्‍योंकि पृथ्‍वी से उसका प्राण उठा लिया जाता है।”

34इस पर खोजे ने फिलिप्‍पुस से पूछा, “मैं तुझ से विनती करता हूँ, यह बता कि भविष्‍यद्वक्‍ता यह किस के विषय में कहता है, अपने या किसी दूसरे के विषय में?”

35तब फिलिप्‍पुस ने अपना मुँह खोला, और इसी शास्‍त्र से आरम्‍भ करके उसे यीशु का सुसमाचार सुनाया।

36मार्ग में चलते-चलते वे किसी जल की जगह पहुँचे, तब खोजे ने कहा, “देख यहाँ जल है, अब मुझे बपतिस्‍मा लेने में क्‍या रोक है?”

37फिलिप्‍पुस ने कहा, “यदि तू सारे मन से विश्‍वास करता है तो ले सकता है।” उसने उत्तर दिया, “मैं विश्‍वास करता हूँ कि यीशु मसीह परमेश्‍वर का पुत्र है।”

38तब उसने रथ खड़ा करने की आज्ञा दी, और फिलिप्‍पुस और खोजा दोनों जल में उतर पड़े, और उसने उसे बपतिस्‍मा दिया।

39जब वे जल में से निकलकर ऊपर आए, तो प्रभु का आत्‍मा फिलिप्‍पुस को उठा ले गया, और खोजे ने उसे फिर न देखा, और वह आनन्‍द करता हुआ अपने मार्ग चला गया।

40फिलिप्‍पुस अशदोद में आ निकला, और जब तक कैसरिया में न पहुँचा, तब तक नगर-नगर सुसमाचार सुनाता गया।

Copyright © 2017 Bridge Connectivity Solutions. Released under the Creative Commons Attribution No Derivatives license 4.0.

Choose Translation

Switch translation for Acts 8.

Reading Settings

Paragraph viewDisplay verses as flowing paragraphs instead of individual lines
Show verse numbersDisplay verse numbers inline
Red letterHighlight the words of Christ in red

Sign in to save your reading preferences across sessions.