Acts 142017

1इकुनियुम में ऐसा हुआ कि वे यहूदियों की आराधनालय में साथ-साथ गए, और ऐसी बातें की, कि यहूदियों और यूनानियों दोनों में से बहुतों ने विश्‍वास किया।

2परन्‍तु विश्वास न करने वाले यहूदियों ने अन्‍यजातियों के मन भाइयों के विरोध में भड़काए, और कटुता उत्पन्न कर दी।

3और वे बहुत दिन तक वहाँ रहे, और प्रभु के भरोसे पर हियाव से बातें करते थे: और वह उनके हाथों से चिन्‍ह और अद्भुत काम करवाकर अपने अनुग्रह के वचन पर गवाही देता था।

4परन्‍तु नगर के लोगों में फूट पड़ गई थी; इससे कितने तो यहूदियों की ओर, और कितने प्रेरितों की ओर हो गए।

5परन्‍तु जब अन्‍यजाति और यहूदी उनका अपमान और उन्‍हें पत्थराव करने के लिये अपने सरदारों समेत उन पर दौड़े।

6तो वे इस बात को जान गए, और लुकाउनिया के लुस्‍त्रा और दिरबे नगरों में, और आसपास के प्रदेशों में भाग गए।

7और वहाँ सुसमाचार सुनाने लगे।

8लुस्‍त्रा में एक मनुष्‍य बैठा था, जो पाँवों का निर्बल था। वह जन्‍म ही से लंगड़ा था, और कभी न चला था।

9वह पौलुस को बातें करते सुन रहा था और पौलुस ने उसकी ओर टकटकी लगाकर देखा कि इस को चंगा हो जाने का विश्‍वास है।

10और ऊँचे शब्‍द से कहा, “अपने पाँवों के बल सीधा खड़ा हो।” तब वह उछलकर चलने फिरने लगा।

11लोगों ने पौलुस का यह काम देखकर लुकाउनिया भाषा में ऊँचे शब्‍द से कहा, “देवता मनुष्‍यों के रुप में होकर हमारे पास उतर आए हैं।”

12और उन्होंने बरनबास को ज्‍यूस, और पौलुस को हिरमेस कहा क्‍योंकि वह बातें करने में मुख्‍य था।

13और ज्‍यूस के उस मन्‍दिर का पुजारी जो उनके नगर के सामने था, बैल और फूलों के हार फाटकों पर लाकर लोगों के साथ बलिदान करना चाहता था।

14परन्‍तु बरनबास और पौलुस प्रेरितों ने जब सुना, तो अपने कपड़े फाड़े, और भीड़ की ओर लपक गए, और पुकारकर कहने लगे,

15“हे लोगो, तुम क्‍या करते हो? हम भी तो तुम्‍हारे समान दु:ख-सुख भोगी मनुष्‍य हैं, और तुम्‍हें सुसमाचार सुनाते हैं, कि तुम इन व्‍यर्थ वस्‍तुओं से अलग होकर जीवते परमेश्‍वर की ओर फिरो, जिसने स्‍वर्ग और पृथ्‍वी और समुद्र और जो कुछ उनमें है बनाया।

16उसने बीते समयों में सब जातियों को अपने-अपने मार्गों में चलने दिया।

17तौभी उसने अपने आप को बे-गवाह न छोड़ा; किन्‍तु वह भलाई करता रहा, और आकाश से वर्षा और फलवन्‍त ऋतु देकर तुम्‍हारे मन को भोजन और आनन्‍द से भरता रहा।”

18यह कहकर भी उन्होंने लोगों को बड़ी कठिनाई से रोका कि उनके लिये बलिदान न करें।

19परन्‍तु कितने यहूदियों ने अन्‍ताकिया और इकुनियम से आकर लोगों को अपनी ओर कर लिया, और पौलुस को पथराव किया, और मरा समझकर उसे नगर के बाहर घसीट ले गए।

20पर जब चेले उसकी चारों ओर आ खड़े हुए, तो वह उठकर नगर में गया और दूसरे दिन बरनबास के साथ दिरबे को चला गया।

21और वे उस नगर के लोगों को सुसमाचार सुनाकर, और बहुत से चेले बनाकर, लुस्‍त्रा और इकुनियम और अन्‍ताकिया को लौट आए।

22और चेलों के मन को स्‍थिर करते रहे और यह उपदेश देते थे कि विश्वास में बने रहो; और यह कहते थे, “हमें बड़े क्‍लेश उठाकर परमेश्‍वर के राज्‍य में प्रवेश करना होगा।”

23और उन्होंने हर एक कलीसिया में उनके लिये प्राचीन ठहराए, और उपवास सहित प्रार्थना करके उन्‍हें प्रभु के हाथ सौंपा जिस पर उन्होंने विश्‍वास किया था।

24और पिसिदिया से होते हुए वे पंफूलिया में पहुँचे;

25और पिरगा में वचन सुनाकर अत्तलिया में आए।

26और वहाँ से जहाज द्वारा अन्‍ताकिया गये, जहाँ वे उस काम के लिये जो उन्होंने पूरा किया था परमेश्‍वर के अनुग्रह में सौंपे गए।

27वहाँ पहुँचकर, उन्होंने कलीसिया इकट्ठी की और बताया, कि परमेश्‍वर ने हमारे साथ होकर कैसे बड़े-बड़े काम किए! और अन्‍यजातियों के लिये विश्‍वास का द्वार खोल दिया।

28और वे चेलों के साथ बहुत दिन तक रहे।

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