2 Thessalonians 22017

1हे भाइयों, हम अपने प्रभु यीशु मसीह के आने, और उसके पास अपने इकट्ठे होने के विषय में तुम से बिनती करते हैं।

2कि किसी आत्‍मा, या वचन, या पत्री के द्वारा जो कि मानों हमारी ओर से हो, यह समझकर कि प्रभु का दिन आ पहुँचा है, तुम्‍हारा मन अचानक अस्‍थिर न हो जाए; और न तुम घबराओ।

3किसी रीति से किसी के धोखे में न आना क्‍योंकि वह दिन न आएगा, जब तक धर्म का त्‍याग न हो ले, और वह पाप का पुरूष अर्थात् विनाश का पुत्र प्रगट न हो।

4जो विरोध करता है, और हर एक से जो परमेश्‍वर, या पूज्‍य कहलाता है, अपने आप को बड़ा ठहराता है, यहाँ तक कि वह परमेश्‍वर के मन्‍दिर में बैठकर अपने आप को परमेश्‍वर प्रगट करता है।

5क्‍या तुम्‍हें स्‍मरण नहीं, कि जब मैं तुम्‍हारे यहाँ था, तो तुम से ये बातें कहा करता था?

6और अब तुम उस वस्‍तु को जानते हो, जो उसे रोक रही है, कि वह अपने ही समय में प्रगट हो।

7क्‍योंकि अधर्म का भेद अब भी कार्य करता जाता है, पर अभी एक रोकनेवाला है, और जब तक वह दूर न हो जाए, वह रोके रहेगा।

8तब वह अधर्मी प्रगट होगा, जिसे प्रभु यीशु अपने मुँह की फूँक से मार डालेगा, और अपने आगमन के तेज से भस्‍म करेगा।

9उस अधर्मी का आना शैतान के कार्य के अनुसार सब प्रकार की झूठी सामर्थ, और चिन्‍ह, और अद्भुत काम के साथ।

10और नाश होनेवालों के लिये अधर्म के सब प्रकार के धोखे के साथ होगा; क्‍योंकि उन्‍होंने सत्‍य के प्रेम को ग्रहण नहीं किया जिस से उन का उद्धार होता।

11और इसी कारण परमेश्‍वर उन में एक भटका देनेवाली सामर्थ को भेजेगा ताकि वे झूठ की प्रतीति करें।

12और जितने लोग सत्‍य की प्रतीति नहीं करते, वरन अधर्म से प्रसन्‍न होते हैं, सब दण्‍ड पाएँ।

13पर हे भाइयो, और प्रभु के प्रिय लोगो चाहिये कि हम तुम्‍हारे विषय में सदा परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करते रहें, कि परमेश्‍वर ने आदि से तुम्‍हें चुन लिया; कि आत्‍मा के द्वारा पवित्र बनकर, और सत्‍य की प्रतीति करके उद्धार पाओ।

14जिस के लिये उस ने तुम्‍हें हमारे सुसमाचार के द्वारा बुलाया, कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह की महिमा को प्राप्‍त करो।

15इसलिये, हे भाइयों, स्‍थिर रहो; और जो जो बातें तुम ने क्‍या वचन, क्‍या पत्री के द्वारा हम से सीखी है, उन्‍हें थामे रहो।

16हमारा प्रभु यीशु मसीह आप ही, और हमारा पिता परमेश्‍वर जिस ने हम से प्रेम रखा, और अनुग्रह से अनन्‍त शान्‍ति और उत्तम आशा दी है।

17तुम्‍हारे मनों में शान्‍ति दे, और तुम्‍हें हर एक अच्‍छे काम, और वचन में दृढ़ करे।।

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