2 Peter 32017

1हे प्रियो, अब मैं तुम्‍हें यह दूसरी पत्री लिखता हूँ, और दोनों में सुधि दिलाकर तुम्‍हारे शुद्ध मन को उभारता हूँ,

2कि तुम उन बातों को, जो पवित्र भविष्यद्वक्ताओं ने पहिले से कही हैं और प्रभु, और उद्धारकर्ता की उस आज्ञा को स्‍मरण करो, जो तुम्‍हारे प्रेरितों के द्वारा दी गई थी।

3और यह पहिले जान लो, कि अन्‍तिम दिनों मे हाँसी ठट्ठा करनेवाले आएँगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे।

4और कहेंगे, “उसके आने की प्रतिज्ञा कहाँ गई? क्‍योंकि जब से बाप-दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्‍टि के आरम्‍भ से था?”

5वे तो जान बूझकर यह भूल गए, कि परमेश्‍वर के वचन के द्वारा से आकाश प्राचीन काल से वर्तमान है और पृथ्‍वी भी जल में से बनी और जल में स्‍थिर है,

6इन्‍हीं के द्वारा उस युग का जगत जल में डूब कर नाश हो गया।

7पर वर्तमान काल के आकाश और पृथ्‍वी उसी वचन के द्वारा इसलिये रखे हैं, कि जलाए जाएँ; और वह भक्तिहीन मनुष्‍यों के न्‍याय और नाश होने के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे।

8हे प्रियों, यह एक बात तुम से छिपी न रहे, कि प्रभु के यहाँ एक दिन हजार वर्ष के बराबर है, और हजार वर्ष एक दिन के बराबर हैं।

9प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्‍हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन् यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले।

10परन्‍तु प्रभु का दिन चोर की नाई आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़ हड़ाहट के शब्‍द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त होकर पिघल जाएँगे, और पृथ्‍वी और उस पर के काम जल जाऐंगे।

11तो जब कि ये सब वस्‍तुएँ, इस रीति से पिघलनेवाली हैं, तो तुम्‍हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्‍य होना चाहिए,

12और परमेश्‍वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्‍द आने के लिये कैसा यत्‍न करना चाहिए; जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएँगे, और आकाश के गण बहुत ही तप्‍त होकर गल जाएँगे ।

13पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्‍वी की आस देखते हैं जिन में धार्मिकता वास करेगी।

14इसलिये, हे प्रियो, जब कि तुम इन बातों की आस देखते हो तो यत्‍न करो कि तुम शान्‍ति से उसके सामने निष्‍कलंक और निर्दोष ठहरो।

15और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसे हमारे प्रिय भाई पौलुस ने भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्‍हें लिखा है।

16वैसे ही उस ने अपनी सब पत्रियों में भी इन बातों की चर्चा की है जिन में कितनी बातें ऐसी है, जिनका समझना कठिन है, और अनपढ़ और चंचल लोग उन के अर्थों को भी पवित्र शास्‍त्र की और बातों के समान खींच तानकर अपने ही नाश का कारण बनाते हैं।

17इसलिये हे प्रियो तुम लोग पहिले ही से इन बातों को जानकर चौकस रहो, ताकि अधर्मियों के भ्रम में फंसकर अपनी स्‍थिरता को हाथ से कहीं खो न दो।

18पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन।

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