2 Corinthians 52017

1क्‍योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्‍वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्‍वर की ओर से स्‍वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्‍तु चिरस्‍थाई है।

2इस में तो हम कहरते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें।

3कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएँ।

4और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कहरते रहते हैं; क्‍योंकि हम उतारना नहीं, वरन् और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए।

5और जिस ने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्‍वर है, जिस ने हमें बयाने में आत्‍मा भी दिया है।

6सो हम सदा ढाढ़स बाँधे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं।

7क्‍योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्‍वास से चलते हैं।

8इसलिये हम ढाढ़स बाँधे रहते हैं, और देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं।

9इस कारण हमारे मन की उमंग यह है, कि चाहे साथ रहें, चाहे अलग रहें पर हम उसे भाते रहें।

10क्‍योंकि अवश्‍य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्‍याय आसन के साम्‍हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उसने देह के द्वारा किए हों, पाए।

11सो प्रभु का भय मानकर हम लोगों को समझाते हैं और परमेश्‍वर पर हमारा हाल प्रगट है; और मेरी आशा यह है, कि तुम्‍हारे विवेक- पर भी प्रगट हुआ होगा।

12हम फिर भी अपनी बड़ाई तुम्‍हारे साम्‍हने नहीं करते वरन् हम अपने विषय में तुम्‍हें घमण्‍ड करने का अवसर देते हैं, कि तुम उन्‍हें उत्तर दे सको, जो मन पर नहीं, वरन् दिखावटी बातों पर घमण्‍ड करते हैं।

13यदि हम बेसुध हैं, तो परमेश्‍वर के लिये; और यदि चैतन्‍य हैं, तो तुम्‍हारे लिये हैं।

14क्‍योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए।

15और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएँ परन्‍तु उसके लिये जो उनके लिये मरा और फिर जी उठा।

16सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे।

17सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं।

18और सब बातें परमेश्‍वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल मिलाप कर लिया, और मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।

19अर्थात् परमेश्‍वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उनके अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।

20सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्‍वर हमारे द्वारा समझात है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्‍वर के साथ मेल मिलाप कर लो।

21जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उसमें होकर परमेश्‍वर की धार्मिकता बन जाएँ।

Copyright © 2017 Bridge Connectivity Solutions. Released under the Creative Commons Attribution No Derivatives license 4.0.

Choose Translation

Switch translation for 2 Corinthians 5.

Reading Settings

Paragraph viewDisplay verses as flowing paragraphs instead of individual lines
Show verse numbersDisplay verse numbers inline
Red letterHighlight the words of Christ in red

Sign in to save your reading preferences across sessions.