1 Corinthians 62017

1क्‍या तुम में से किसी को यह हियाव है, कि जब दूसरे के साथ झगड़ा हो, तो फैसले के लिये अधर्मियों के पास जाए; और पवित्र लोगों के पास न जाए?

2क्‍या तुम नहीं जानते, कि पवित्र लोग जगत का न्‍याय करेंगे? सो तब तुम्‍हें जगत का न्‍याय करना है, तो क्‍या तुम छोटे से छोटे झगड़ों का भी निर्णय करने के योग्‍य नहीं?

3क्‍या तुम नहीं जानते, कि हम स्‍वर्गदूतों का न्‍याय करेंगे? तो क्‍या सांसारिक बातों का निर्णय न करे?

4सो यदि तुम्‍हें सांसारिक बातों का निर्णय करना हो, तो क्‍या उन्‍हीं को बैठाओगे जो कलीसिया में कुछ नहीं समझे जाते हैं?

5मैं तुम्‍हें लज्‍जित करने के लिये यह कहता हूँ: क्‍या सचमुच तुम में से एक भी बुद्धिमान नहीं मिलता, जो अपने भाइयों का निर्णय कर सके?

6बरन भाई-भाई में मुकद्दमा होता है, और वह भी अविश्‍वासियों के साम्‍हने।

7परन्‍तु सचमुच तुम में बड़ा दोष तो यह है, कि आपस में मुकद्दमा करते हो: बरन अन्‍याय क्‍यों नहीं सहते? अपनी हानि क्‍यों नहीं सहते?

8बरन अन्‍याय करते और हानि पहुँचाते हो, और वह भी भाइयों को।

9क्‍या तुम नहीं जानते, कि अन्‍यायी लोग परमेश्‍वर के राज्‍य के वारिस न होंगे? धोखा न खाओ, न वेश्‍यागामी, न मूर्त्तिपूजक, न परस्‍त्रीगामी, न लुच्‍चे, न पुरूषगामी।

10न चोर, न लोभी, न पियक्‍कड़, न गाली देनेवाले, न अन्‍धेर करनेवाले परमेश्‍वर के राज्‍य के वारिस होंगे।

11और तुम में से कितने ऐसे ही थे, परन्‍तु तुम प्रभु यीशु मसीह के नाम से और हमारे परमेश्‍वर के आत्‍मा से धोए गए, और पवित्र हुए और धर्मी ठहरे।

12सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित तो हैं, परन्‍तु सब वस्तुएँ लाभ की नहीं, सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित हैं, परन्‍तु मैं किसी बात के आधीन न हूँगा।

13भोजन पेट के लिये, और पेट भोजन के लिये है, परन्‍तु परमेश्‍वर इस को और उसको दोनों को नाश करेगा, परन्‍तु देह व्‍यभिचार के लिये नहीं, बरन प्रभु के लिये; और प्रभु देह के लिये है।

14और परमेश्‍वर ने अपनी सामर्थ से प्रभु को जिलाया, और हमें भी जिलाएगा।

15क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम्‍हारी देह मसीह के अंग हैं? सो क्‍या मैं मसीह के अंग लेकर उन्‍हें वेश्‍या के अंग बनाऊं? कदापि नहीं।

16क्‍या तुम नहीं जानते, कि जो कोई वेश्‍या से संगति करता है, वह उसके साथ एक तन हो जाता है क्‍योंकि वह कहता है, “वे दोनों एक तन होंगे।”

17और जो प्रभु की संगति में रहता है, वह उसके साथ एक आत्‍मा हो जाता है।

18व्‍यभिचार से बचे रहो: जितने और पाप मनुष्‍य करता है, वे देह के बाहर हैं, परन्‍तु व्‍यभिचार करनेवाला अपनी ही देह के विरूद्ध पाप करता है।

19क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम्‍हारी देह पवित्रात्‍मा का मन्‍दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्‍हें परमेश्‍वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो?

20कयोंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्‍वर की महिमा करो।

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